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भ्रष्टाचार की भेंट या विभाग की लापरवाही? गोयला-सुआ सड़क पर बारिश ने खोली विकास की पोल

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चंडी पवन सिंघ

कहते हैं कि “नींव मजबूत हो तो इमारत सालों साल टिकती है,” लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) के ‘अनोखे’ इंजीनियरिंग कौशल ने इस कहावत को ही बदल दिया है। दून विधानसभा क्षेत्र की गोयला-सुआ सड़क इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ विभाग की अदूरदर्शिता के कारण हाल ही में की गई मरम्मत पहली ही बारिश में बह गई।
हाल ही में हिमाचल आज तक द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद PWD (सब डिवीजन चंडी) ने आनन-फानन में जेसीबी के जरिए सड़क पर मिट्टी और गटका तो बिछाया, लेकिन जल निकासी की बुनियादी जरूरत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि बारिश का पानी सड़क को अपने साथ बहा ले गया और अब यहाँ सड़क कम, कीचड़ का दलदल ज्यादा नजर आता है।
सड़क की इस बदहाली के पीछे विभाग की भारी लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत के वक्त उन्होंने बार-बार पानी की निकासी के लिए नालियाँ बनाने का आग्रह किया था।
जब हमने कर्मचारियों से नालियों के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ कह दिया कि उनके पास नालियाँ बनाने के ऑर्डर नहीं हैं। अब बिना नाली के पानी सड़क पर नहीं आएगा तो कहाँ जाएगा? विभाग ने जनता को राहत देने के बजाय मुसीबत और बढ़ा दी है। बिना ड्रेनेज सिस्टम (नालियों) के सड़क पर मिट्टी डालना केवल कागजी खानापूर्ति साबित हुआ। सरकारी धन की बर्बादी बिना किसी तकनीकी सूझबूझ के किया गया खर्च पहली ही बारिश में बेकार हो गया। वर्तमान में सड़क की स्थिति ऐसी है कि पैदल चलना भी जान जोखिम में डालने जैसा है।
गुस्साए ग्रामीणों ने अब सीधे दून के विधायक राम कुमार चौधरी से हस्तक्षेप की अपील की है। ग्रामीणों की स्पष्ट माँग है कि पानी की निकासी के लिए पक्की नालियों का निर्माण अनिवार्य किया जाए। सड़क की टारिंग (तारकोल बिछाना) कर इसे स्थायी रूप से पक्का किया जाए।

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