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छमकड़ी के अखाड़े में गरजे देशभर के पहलवान, बेटियों के दमखम ने लूटी महफ़िल।

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गोयला पवन सिंघ:-

गोयला पंचायत के छमकड़ी में आयोजित एक दिवसीय पारंपरिक मेला इस वर्ष खेल, संस्कृति और सामाजिक एकता का भव्य उत्सव बनकर सामने आया।** मेले में हजारों लोगों की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को उत्साह और उमंग से भर दिया। दंगल प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया तथा पूरे दिन क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बना रहा। कार्यक्रम में दुन विधानसभा क्षेत्र के समाजसेवी विधि चंद राणा और गुरमेल चौधरी ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने नव-निर्वाचित ग्राम पंचायत गोयला की प्रधान निर्मला देवी उपप्रधान गुरुदेव तथा बीडीसी सदस्य प्रियंका ठाकुर को हार पहनाकर सम्मानित किया। युवक मंडल, मेला कमेटी और दंगल समिति की ओर से भी अतिथियों का शाल ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया गया। मेले का मुख्य आकर्षण विशाल दंगल प्रतियोगिता रही, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश से पहुंचे नामी पहलवानों ने अखाड़े में अपने दमखम का प्रदर्शन किया। रोमांचक मुकाबलों ने दर्शकों को देर शाम तक बांधे रखा। स्थानीय पहलवानों ने भी शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। दंगल में सबसे अधिक चर्चा लड़कियों की कुश्तियों की रही। बेटियों ने पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ अखाड़े में उतरकर बेहतरीन मुकाबले पेश किए। उनकी प्रतिभा और साहस को देखकर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। लड़कियों की भागीदारी ने क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। दंगल प्रतियोगिता को प्रोत्साहित करने के लिए अतिथियों और जनप्रतिनिधियों ने आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। गुरमेल चौधरी ने ₹5100, विधि चंद राणा ने ₹6100, बीडीसी सदस्य प्रियंका ठाकुर ने ₹2100, प्रधान निर्मला देवी ने ₹2100 तथा उपप्रधान गुरुदेव ने ₹6100 की राशि अपनी निजी आय से दंगल कमेटी को भेंट की। दंगल समिति ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सहयोग से ग्रामीण खेलों और परंपराओं को नई ऊर्जा मिलती है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मेले और दंगल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से खेलों को अपनाने तथा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया। मेले के दौरान मेला कमेटी की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे दिन चले इस आयोजन ने क्षेत्रवासियों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य किया।छमकड़ी मेला न केवल मनोरंजन और खेल भावना का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का एक सफल प्रयास भी साबित हुआ।

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