ब्यूरो
डुमैहर जिला परिषद वार्ड से तीसरी बार निर्वाचित आशा परिहार के साथ एक बार फिर राजनीति की शिकार हो गई। चार बार जिला परिषद सदस्य निर्वाचित हुई शीला अध्यक्ष बन गई लेकिन तीसरी बार सदस्य निर्वाचित आशा परिहार उपाध्यक्ष भी नहीं बन सकी। मौजूदा जिला परिषद में आशा परिहार एकमात्र ऐसी सदस्य हैं जो पिछली जिला परिषद की भी सदस्य रही है।
पहले दो चुनाव में टिकट में अनदेखी हुई, फिर भी निर्दलीय चुनाव जीतने में कामयाब रही। इस बार पार्टी का टिकट मिला तो उपाध्यक्ष में अनदेखी हो गई। भाजपा जिला अध्यक्ष रत्न सिंह पाल के अर्की निर्वाचन क्षेत्र के साथ हुए इस भेदभाव पर सवाल खडे हो रहें है। मजेदार बात यह है कि जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चयन के लिए जिन नेताओं को जिम्मेवारी सौपी गई थी, वे पार्टी में आशा परिहार के जूनियर हैं क्यूंकि उन्होंने 2003 में टिकट के लिए दावा ठोक दिया था। यह अलग बात है कि उन्हें टिकट नहीं मिला।






