शिमला,
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, जिला शिमला द्वारा डॉ. हेडगेवार भवन, नाभा (शिमला) में संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती बड़े उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में शिक्षा, समाज एवं विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, माँ सरस्वती के समक्ष पुष्पांजलि, सरस्वती वंदना एवं राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ।
कार्यक्रम संयोजक एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. रामकृष्ण मार्कण्डेय ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए कहा कि संत रविदास जी का जीवन समरसता, समानता एवं मानवता का अनुपम संदेश देता है, जिसे समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है।
इसके उपरांत विश्वविद्यालय इकाई के महामंत्री प्रो. राकेश नेगी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती मनाने का उद्देश्य उनके विचारों को समाज एवं नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षक सम्मान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। महासंघ शिक्षकों को संगठित कर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, हिमाचल प्रदेश के प्रांत अध्यक्ष विनोद सूद ने की। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ संपूर्ण भारत बर्ष में जिला स्तर पर संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती की व्याख्यान कार्यक्रम कर रहा है। उन्होंने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के द्वारा वर्ष भर में होने वाले कार्यक्रमों तथा उनकी प्रासंगिकता के बारे में भी विचार व्यक्त किए ।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख देशराज ठाकुर ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, आत्मसम्मान, समानता और राष्ट्र निर्माण की अमूल्य प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि “मनुष्य की श्रेष्ठता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, कर्म और समाज के प्रति समर्पण से निर्धारित होती है। संत रविदास जी का संदेश आज भी समाज को जोड़ने और राष्ट्र को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है।” उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. चमन लाल बंगा, पूर्व विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला ने अपने संबोधन में कहा कि “संत रविदास जी ने समानता, सामाजिक न्याय और मानवता का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। शिक्षा ही वह माध्यम है जो समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर समरस एवं सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।” उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को समाज में सकारात्मक चेतना उत्पन्न करने वाला बताया तथा महासंघ के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त महामंत्री भीष्म सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में लगे सभी कार्यकर्ताओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने संत रविदास जी के समरसता, समानता एवं मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने तथा सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में जिला शिमला की सामाजिक संस्थाओं ,धार्मिक संस्थाओं के साथ-साथ ओम शांति,आर्ट ऑफ लिविंग व पतंजलि योगपीठ तथा विविध संगठनों के प्रांत व जिला स्तर के कार्यकर्ता बंधु एवं भगिनी , अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कार्यकर्ता तथा अध्यापक बंधु व भगिनी भी सम्मिलित हुए।






