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ऐतिहासिक बाड़ीधार मेले को जिला स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान होने पर लोगों में खुशी की लहर

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दाड़लाघाट:- जिला सोलन की अर्की तहसील के प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक बाड़ीधार मेले को जिला स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान कर दिया गया है। प्रदेश मंत्रिमंडल की शनिवार को आयोजित बैठक में इस संबंध में मंजूरी प्रदान की गई। सरकार के इस निर्णय से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है तथा लोगों ने इसे क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती देने वाला कदम बताया है। बाड़ीधार मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मेले का इतिहास पांडवों के अज्ञातवास काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में भगवान शिव की खोज की थी, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया। हर वर्ष आषाढ़ मास की संक्रांति, लगभग 14 से 15 जून के आसपास आयोजित होने वाला यह मेला हजारों श्रद्धालुओं और लोगों को आकर्षित करता है। मेले की पूर्व संध्या पर पारंपरिक जगराते का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु भाग लेते हैं। मेले का प्रमुख आकर्षण बाड़ेश्वर महादेव मंदिर है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। बाड़ीधार मेला केवल सोलन जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों और क्षेत्रों के लोगों के लिए भी आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जिला स्तरीय मेले का दर्जा मिलने से मेले की पहचान और अधिक बढ़ेगी तथा क्षेत्र के पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय व्यापार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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