दाड़लाघाट। दाड़लाघाट में करीब 2 करोड़ 87 लाख 56 हजार रुपये की लागत से बनाया गया 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) आज भी अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में वर्तमान में एक डॉक्टर, एक नर्स और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। अस्पताल में फिलहाल मुख्य रूप से ओपीडी सेवाएं ही संचालित हो रही हैं और 30 बेड होने के बावजूद मरीजों को भर्ती करने की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 40 से 50 मरीज ओपीडी में जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति के बाद लोगों को सामान्य उपचार के लिए स्थानीय स्तर पर राहत मिली है, लेकिन आवश्यक जांच और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को आगे रेफर करना पड़ता है। डॉक्टर द्वारा लिखे गए टेस्ट करवाने के लिए भी मरीजों को निजी लैब या दूसरे सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। सीएचसी में लैब जांच और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि एक्स-रे मशीन की सुविधा भी अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है। ऐसे में 30 बेड का अस्पताल होने के बावजूद इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

शाम चार बजे के बाद नहीं मिलता डॉक्टर
अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक ही उपलब्ध हैं। इसके बाद नए अस्पताल भवन में डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहता। रात के समय किसी मरीज की हालत गंभीर होने या दुर्घटना में घायल व्यक्ति के अस्पताल पहुंचने पर तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती और मरीज को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ता है। दाड़लाघाट स्थित ईएसआई स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार मिल जाता है, लेकिन गंभीर मरीजों को आगे अर्की, शिमला या एम्स बिलासपुर रेफर करना पड़ता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि दाड़लाघाट में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को शुरुआती उपचार स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा और उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।
एनएच-205 के कारण ट्रॉमा सुविधा की जरूरत
दाड़लाघाट से शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग-205 गुजरता है। यहां अंबुजा सीमेंट उद्योग भी स्थित है और हाईवे पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही रहती है। पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं और बस हादसे भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रवासियों का कहना है कि दाड़लाघाट सीएचसी में ट्रॉमा सुविधा और 24 घंटे आपातकालीन सेवा होना बेहद जरूरी है।
23 पंचायतों की आबादी को मिलेगी राहत
दाड़लाघाट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली करीब 23 पंचायतों की हजारों की आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है। वर्ष 2019 में तैयार किए गए इस अस्पताल को शुरू होने में करीब पांच वर्ष लगे। लोगों को उम्मीद थी कि अस्पताल शुरू होने के बाद उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर और पूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन वर्तमान में अस्पताल मुख्य रूप से ओपीडी तक ही सीमित है।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के एक साल बाद भी सुविधाओं का इंतजार
दाड़लाघाट सीएचसी में सुविधाएं बढ़ाने की मांग पहले भी सरकार के समक्ष उठाई जा चुकी है। 20 जुलाई 2025 को करीब 20 पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक संजय अवस्थी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित करने की मांग उठाई थी। मुख्यमंत्री ने उस समय आवश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था। अब अगस्त 2026 में उस आश्वासन को करीब एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा और आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में सवाल यह है कि 30 बेड का यह अस्पताल अपनी पूरी क्षमता के साथ कब संचालित होगा।
जनता की मांग
क्षेत्रवासियों ने सरकार से दाड़लाघाट सीएचसी में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा शुरू करने, मरीजों को भर्ती करने की सुविधा प्रभावी रूप से संचालित करने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की है। लोगों ने लैब, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ट्रॉमा सुविधा शुरू करने के साथ पर्याप्त स्वास्थ्य स्टाफ की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि इससे दाड़लाघाट सहित आसपास की 23 पंचायतों की हजारों की आबादी को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी।
क्या कहते हैं अधिकारी….
बीएमओ अर्की मुक्ता रस्तोगी का कहना है कि दाड़लाघाट सीएचसी में स्वीकृत पदों के अनुसार जितने स्टाफ की नियुक्ति की गई है, वह पूरी है। केवल एक डॉक्टर का पद रिक्त चल रहा है, जिसके संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन की स्वीकृति अभी नहीं हुई है, हालांकि इस संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। वहीं, लैब सुविधा शुरू करने को लेकर भी उच्चाधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवाया जा रहा है।






