कुनिहार
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर 1 सितंबर को शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन एवं रैली में प्रदेश के सभी प्रमुख पेंशनर संगठनों के प्रदेश, जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों तथा करीब 15 हजार पेंशनरों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इस ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से सभी पेंशनर साथियों का हार्दिक स्वागत एवं धन्यवाद किया जाता है।
समिति के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर सरकार को सौंपे गए 14 सूत्रीय मांगपत्र के समर्थन में पिछले एक वर्ष से अधिक समय के दौरान यह तीसरा राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन था। इन आंदोलनों के बीच सरकार तथा सरकार द्वारा प्रायोजित कुछ स्वयंभू एवं तथाकथित पेंशनर नेताओं द्वारा बार-बार पेंशनरों की एकता को तोड़ने और आंदोलन को कमजोर करने के प्रयास किए गए। यह प्रचारित किया गया कि सरकार ने 65 वर्ष तक की आयु वाले पेंशनरों को उनकी सभी देनदारियां दे दी हैं तथा शेष पेंशनरों को दिवाली पर मुख्यमंत्री तोहफा देंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले पेंशनरों की देनदारियों को आयु वर्ग में बांटा और बाद में उन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभाजित करने का प्रयास किया, ताकि जिन पेंशनरों को कुछ भुगतान हो चुका है, उन्हें आंदोलन से अलग किया जा सके। लेकिन प्रदेश के करीब दो लाख पेंशनरों ने सरकार की इस नीति को पूरी तरह नकार दिया। यही कारण है कि 92 वर्ष तक की आयु के पेंशनर भी, जिनकी अधिकांश देनदारियां चुकता हो चुकी हैं और केवल 15 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) की राशि बकाया है, आंदोलन में बढ़-चढ़कर शामिल हुए।
समिति ने कहा कि प्रदेश के पेंशनर एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे तथा सरकार के किसी भी षड्यंत्र को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
1 सितंबर को चार घंटे तक चला धरना
1 सितंबर को शिमला में आयोजित धरना-प्रदर्शन करीब चार घंटे तक जारी रहा। भारी बारिश के बावजूद हजारों पेंशनर अपने स्थान पर डटे रहे। समिति के नेताओं ने कहा कि एक ओर प्रदेश के बुजुर्ग पेंशनर अपनी जायज मांगों को लेकर बारिश में धरना दे रहे थे, वहीं सरकार विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त रही और पेंशनरों को वार्ता के लिए बुलाने तक की पहल नहीं की गई। इससे सरकार का पेंशनरों के प्रति रवैया स्पष्ट हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक बार फिर साबित किया है कि वह प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन है तथा तानाशाही रवैया अपना रही है।
संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ, आगामी रणनीति जल्द तय होगी
संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि पेंशनरों की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा। आगामी 15 दिनों के भीतर राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर करेंगे। बैठक में सभी प्रमुख संगठनों के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर आगामी संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी।

समिति ने कहा कि अब सरकार के सामने लंबा संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया है। आने वाले समय में राज्य स्तर के साथ-साथ जिला मुख्यालयों, तहसील एवं ब्लॉक स्तर पर धरना-प्रदर्शन, क्रमिक अनशन, भूख हड़ताल तथा जनता के बीच जाकर संवाद जैसे सभी लोकतांत्रिक विकल्प खुले रखे गए हैं। इन सभी मुद्दों पर कार्यसमिति की बैठक में विस्तृत चर्चा कर अगली रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके लिए पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
सरकार की देनदारियां अभी भी हजारों करोड़ रुपये : समिति
समिति ने मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में 66 वर्ष तक की आयु के पेंशनरों को उनकी देनदारियों का भुगतान किए जाने संबंधी घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दावा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। समिति के अनुसार सरकार के पास अभी भी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की पेंशनरों की देनदारियां शेष हैं। जब तक सरकार इन सभी देनदारियों तथा 15 प्रतिशत महंगाई राहत की बकाया किस्तों का भुगतान नहीं करती, तब तक प्रदेश में पेंशनरों का संघर्ष जारी रहेगा।
राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन, दिल्ली में भी उठेगा मुद्दा
संयुक्त संघर्ष समिति का शीर्ष नेतृत्व शीघ्र ही प्रदेश की वित्तीय स्थिति तथा पेंशनरों की लंबित देनदारियों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन तैयार करेगा, जिसे प्रदेश के राज्यपाल को सौंपा जाएगा। इसके बाद समिति का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर भी प्रदेश की गंभीर वित्तीय स्थिति का मुद्दा उठाएगा।
समिति नेताओं ने कहा कि प्रदेश पर बढ़ते कर्ज के कारण वित्तीय स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रदेश को इस वित्तीय संकट से उबारने के लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
समिति ने दोहराया कि जब तक पेंशनरों की सभी लंबित देनदारियों और 15 प्रतिशत महंगाई राहत की बकाया किस्तों का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों का संघर्ष पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।यदि आप चाहें तो मैं इसका और अधिक तीखा राजनीतिक संस्करण, या समाचार-पत्र में छपने योग्य 500–600 शब्दों का संक्षिप्त संस्करण भी तैयार कर सकता हूं।






