बुघार कनैता पवन सिंघ:-
विकास और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच दून विधानसभा के पहाड़ी क्षेत्र की ग्राम पंचायत बुघार कनैता और बढ़लग पंचायत के कई गांवों के लोगों की स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रही हैं। क्षेत्र की एकमात्र सरकारी स्वास्थ्य संस्था दुर्गापुर-धारड़ी डिस्पेंसरी पिछले लगभग 3 से 4 महीनों से बिना डॉक्टर और फार्मासिस्ट के संचालित हो रही है, जिससे हजारों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस डिस्पेंसरी पर दो पंचायतों के सैकड़ों परिवार निर्भर हैं, वहां वर्तमान में केवल एक क्लास-फोर कर्मचारी महिला ही नियमित रूप से पहुंचकर डिस्पेंसरी का ताला खोलने और बंद करने का कार्य कर रही हैं। लेकिन मरीजों को उपचार देने वाला न कोई डॉक्टर है और न ही दवाइयां उपलब्ध कराने वाला कोई फार्मासिस्ट।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आबादी अधिक होने के कारण यह समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। डिस्पेंसरी से मात्र 500 मीटर की दूरी पर एक स्कूल भी स्थित है, जहां गर्मी के मौसम में बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता। मजबूरन अभिभावकों को बीमार बच्चों और मरीजों को 10 किलोमीटर दूर चंडी या फिर 20 किलोमीटर दूर कुनिहार ले जाना पड़ता है। ऐसे में समय और धन दोनों की बर्बादी के साथ-साथ मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ रही है।
प्रधान ने उठाई आवाज, विधायक ने दिया आश्वासन
ग्राम पंचायत बुघार कनैता के नव निर्वाचित प्रधान रमेश कुमार ने हिमाचल आज तक से बातचीत में बताया कि दुर्गापुर-धारड़ी डिस्पेंसरी स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एकमात्र सहारा है। लेकिन कई महीनों से यहां डॉक्टर और फार्मासिस्ट के पद खाली पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधान रमेश कुमार ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर मुद्दे को दून विधायक राम कुमार चौधरी के समक्ष भी उठाया है। विधायक ने उन्हें आश्वस्त किया है कि मामले का संज्ञान लिया गया है और जल्द ही खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर समस्या का समाधान किया जाएगा।
क्या बोला स्वास्थ्य विभाग?
जब हिमाचल आज तक के पत्रकार ने बीएमओ चंडी डॉ. गुरमेल सिंह से इस विषय पर बातचीत की तो उन्होंने बताया कि दुर्गापुर-धारड़ी डिस्पेंसरी में कार्यरत डॉक्टर और फार्मासिस्ट का प्रमोशन होने के बाद उनका तबादला हो गया था, जिसके चलते दोनों पद रिक्त हो गए हैं।
डॉ. गुरमेल सिंह ने बताया कि इस संबंध में विभाग को पत्र भेज दिया गया है और रिक्त पदों को भरने की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों, इसके लिए सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) की मल्टीपल-डे ड्यूटी लगाई गई है। जब दो पंचायतों और आसपास के गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था एक ही डिस्पेंसरी पर निर्भर हो, तब महीनों तक डॉक्टर और फार्मासिस्ट के पद खाली रहना आखिर किसकी जिम्मेदारी है? क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? यदि कल किसी मरीज की जान समय पर उपचार न मिलने के कारण चली जाती है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा?ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश सरकार से मांग की है कि दुर्गापुर-धारड़ी डिस्पेंसरी में तत्काल प्रभाव से डॉक्टर और फार्मासिस्ट की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्र के हजारों लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दर-दर न भटकना पड़े। “स्वास्थ्य सेवाएं कोई सुविधा नहीं, बल्कि लोगों का अधिकार हैं। पहाड़ के लोगों को इलाज के लिए किलोमीटरों का सफर तय करने पर मजबूर करना व्यवस्था की बड़ी विफलता है।”






