दाड़लाघाट:- पंचायत दाड़लाघाट स्थित श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिवस कथावाचक आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को प्रभु स्मरण, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया। कथा के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। अपने प्रवचन में आचार्य हरि जी महाराज ने कहा कि शिव कथाएं बताती हैं कि अनजाने में अथवा सच्चे मन से भगवान शिव का नाम लेने से भी मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी भगवान शिव की आराधना की, उसका कल्याण हुआ। भगवान शिव कल्याणकारी हैं तथा उनकी भक्ति मनुष्य को आत्मिक शांति और जीवन में सही दिशा प्रदान करती है। कथा के दौरान आचार्य हरि जी महाराज ने शिव परिवार की महिमा का वर्णन करते हुए भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश का प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों के समक्ष एक दिव्य फल रखकर कहा कि जो पहले संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करके लौटेगा, वही इस फल का अधिकारी होगा। भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर बैठकर ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े, जबकि भगवान गणेश ने शांत भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम किया। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो गणेश जी ने कहा कि माता-पिता ही संपूर्ण संसार के समान हैं और उनकी सेवा एवं सम्मान ही सबसे बड़ा धर्म है। भगवान गणेश के इस उत्तर से भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें उस दिव्य फल का अधिकारी घोषित किया।आचार्य हरि जी महाराज ने कहा कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में केवल गति और शक्ति नहीं बल्कि ज्ञान, विवेक, विनम्रता और संस्कार का भी उतना ही महत्व है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में माता-पिता द्वारा बच्चों को अच्छे संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि संस्कारित समाज ही सही दिशा में आगे बढ़ सकता है। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि हिंदू दर्शन में शिव का अर्थ कल्याणकारी है। भगवान शिव अजन्मा एवं निराकार हैं जिन्हें सर्वोच्च शक्ति की संज्ञा दी गई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में प्रभु सिमरन करते रहने, बुरे कर्मों और व्यभिचार से दूर रहने तथा सनातन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया। ॐ नमः शिवाय मंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सृष्टि के आरम्भ में भगवान शंकर ने ही ओम को प्रकट किया और शिव पुराण में भगवान शिव को नाद ब्रह्म स्वरूप बताया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम का जप और तप मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।
आज की कथा में अदाणी सीमेंट दाड़लाघाट के प्लांट यूनिट हेड सुनील चौधरी, एचआर हेड पदम तथा अंबुजा फाउंडेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक संजय शर्मा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।






