कुनिहार। अक्षरेश शर्मा। रामलीला जन कल्याण समिति कुनिहार की ओर से आयोजित रामलीला के सातवें दिन भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की वनवासी वेशभूषा में सजी भव्य झांकी के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन कर कलाकारों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से सीता हरण, जटायु-रावण युद्ध और भक्त शबरी द्वारा भगवान श्रीराम को मीठे बेर खिलाने के प्रसंग आकर्षण का केंद्र रहे।
कार्यक्रम में समाजसेवी विजय पाठक ने आरती में भाग लेकर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लिया। उन्होंने रामलीला के आयोजन के लिए समिति को 7100 रुपये की सहयोग राशि भेंट की। समिति के वरिष्ठ सदस्य राधा रमण शर्मा ने उन्हें पटका पहनाकर और श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया।
स्वर्ण मृग से शुरू हुआ सीता हरण का प्रसंग
रामलीला में दिखाया गया कि पंचवटी में स्वर्ण मृग की सुंदरता देखकर माता सीता ने भगवान श्रीराम से उसे लाने का आग्रह किया। श्रीराम मृग के पीछे चले गए। इसके बाद श्रीराम की पुकार सुनकर माता सीता ने लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए भेज दिया। इसी दौरान रावण ने माता सीता का हरण कर लिया। सीता को बचाने के प्रयास में जटायु और रावण के बीच युद्ध हुआ।
वन से लौटने पर माता सीता को कुटिया में न पाकर श्रीराम और लक्ष्मण व्याकुल हो उठे। दोनों भाई सीता की खोज में वन-वन भटकने लगे। इसी दौरान वे भक्त शबरी की कुटिया पहुंचे। यहां शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक मीठे बेर खिलाए। इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
हनुमान-सुग्रीव से भेंट, बाली वध का मंचन
इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की किष्किंधा पर्वत पर हनुमान और सुग्रीव से भेंट का प्रसंग दिखाया गया। सुग्रीव की सहायता के लिए श्रीराम द्वारा बाली वध और इसके बाद सुग्रीव के साथ मंत्रणा के दृश्य भी मंचित किए गए। अंत में माता सीता की खोज के लिए हनुमान, अंगद और जामवंत सहित वानर सेना को भेजने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
रामलीला का निर्देशन राधा रमण शर्मा ने किया। इस दौरान समिति के प्रधान रितेश जोशी, देवेंद्र शर्मा, अक्षरेश शर्मा, आशीष द्विवेदी, अरविंद जोशी, संजय जोशी, संदीप जोशी, मुकेश शर्मा, रोहित महंत, सूर्यांश, अमन अत्री, गौतम और गोलू सहित समिति के युवा सदस्य मौजूद रहे। सभी सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।






