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शिव-पार्वती का विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि शक्ति और शिव के दिव्य स्वरूप का संगम है:-अचार्य हरि जी महाराज

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दाड़लाघाट:- पंचायत दाड़लाघाट स्थित श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस कथावाचक आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आदर्श दांपत्य जीवन, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रही। अपने प्रवचन में आचार्य हरि जी महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि शक्ति और शिव के दिव्य स्वरूप का संगम है, जो संसार को संतुलन और सृजन का संदेश देता है। आचार्य हरि जी महाराज ने कहा कि जीवन में सफलता और सुख प्राप्त करने के लिए धैर्य, विश्वास और समर्पण आवश्यक है। माता पार्वती की तपस्या हमें लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति अटूट आस्था रखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से परिवार में प्रेम, सम्मान और संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया। कथा में अर्की के विधायक संजय अवस्थी, पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा, पूर्व जिला परिषद सदस्य राम कृष्ण शर्मा, पंचायत प्रधान श्याम सिंह चौधरी, पूर्व उपप्रधान दाड़लाघाट राजेश गुप्ता, अर्की-कशलोग-मांगू परिवहन सभा के अध्यक्ष वेद प्रकाश शुक्ला, बाघल लैंड लूजर के प्रधान जगदीश ठाकुर, संजय ठाकुर, अंबुजा से मनोज कौशल, लाला शंकर दास अरोड़ा, पंचायत सचिव धनीराम, कर्मचंद, दीपक गजपति, राकेश गौतम, कमल ठाकुर, नरेश शर्मा, केशव वशिष्ठ, प्रधान बरायली कृष्ण चंद भट्टी, जयदेव ठाकुर (जेडी), ओम प्रकाश शर्मा, राजीव सोनी गोल्डी, कमल कौंडल, हरि चंद, प्रेम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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