हिमाचल प्रदेश में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की समेकित बागबानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना के तहत बागबानी विभाग की ओर से किसानों और युवाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। योजना के तहत मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए मिलने वाली सबसिडी को आठ लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दिया है। राज्य के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में इस योजना के तहत 42 मशरूम उत्पादन इकाइयां बनकर तैयार हो चुकी हैं। केंद्र प्रायोजित एमआईडीएच योजना वर्ष 2014-15 से संचालित है। इसके तह
त फल, सब्जी, फूल, मसाले व मशरूम सहित विभिन्न बागबानी गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ उत्पादन के बाद की सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को भी मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों में योजना के लिए केंद्र और राज्य के बीच वित्त पोषण का अनुपात 90:10 है। मशरूम उत्पादन के लिए योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इच्छुक किसान और युवा अपेक्षाकृत कम पूंजी लगाकर वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं। कांगड़ा में 42 इकाईयों का तैयार होना इस योजना के जमीनी स्तर पर बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
अब सबसिडी की सीमा आठ से बढक़र 15 लाख रुपए होने से प्रदेश के अन्य जिलों में भी मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए किसानों और युवाओं की रुचि बढऩे की उम्मीद है। अब तक सामने आई सफलता की कहानियों में कांगड़ा में ही कई युवाओं ने नौकरी छोडक़र स्वरोजगार की राह पर चलते हुए एक यूनिट से ही 25 से 50 लोगों के रोजगार के द्वार खोल दिए हैं।






