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दाड़लाघाट महाविद्यालय में हिंदी पखवाड़े का हुआ समापन समारोह

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दाड़लाघाट। राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में मंगलवार को हिंदी पखवाड़े का समापन समारोह उत्साह एवं उल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रुचि रमेश ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। महाविद्यालय में पिछले एक सप्ताह से हिंदी विभाग की ओर से हिंदी पखवाड़े के तहत विभिन्न साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियां करवाई जा रही थीं। विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भाषण, कविता पाठ, पोस्टर निर्माण और रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने इन प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं के परिणामों में भाषण में गीतांजलि ने प्रथम, कविता पाठ में भावना ने प्रथम तथा पोस्टर निर्माण में स्नेहा ने प्रथम स्थान हासिल किया। रंगोली प्रतियोगिता में दिया, भावना और फातमा संयुक्त रूप से प्रथम रहीं। समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने नाटी की मनमोहक प्रस्तुति भी दी। वहीं बूझो तो जाने गतिविधि के माध्यम से हिंदी की रोचक पहेलियां प्रस्तुत की गईं, जिसमें विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हिंदी के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हिंदी विभाग के विद्यार्थियों ने आओ हिंदी में हस्ताक्षर करें पहल भी शुरू की। इसके माध्यम से विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को हिंदी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में पीएम श्री राजकीय विद्यालय दाड़लाघाट के विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की। विद्यालय स्तर पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में अंकिता ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। हिंदी विभागाध्यक्ष सहायक आचार्य रचना तनवर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा किसी भी समाज की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक स्मृति की संवाहक होती है। संस्कृति के संरक्षण के लिए भाषाओं का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के साथ अपनी स्थानीय पहाड़ी बोली के प्रति भी सम्मान रखने और अपनी भाषा या बोली बोलने में किसी तरह की झिझक महसूस न करने का आग्रह किया। मुख्य अतिथि एवं प्राचार्या डॉ. रुचि रमेश ने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के इतिहास, विकास और परंपरा से परिचित करवाते हुए हिंदी को आत्मीयता से अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और विभिन्न भाषाई परंपराओं को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने हिंदी विभाग की ओर से आयोजित गतिविधियों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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