कुनिहार
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों याता
यात नियमों और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सोलन प्रशांत सिंह नेगी ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने यातायात नियमों का पालन करने और कानून के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। इसमें विद्यालय के सभी अध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते मामलों और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि नशे की लत व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करती है। युवाओं को नशे से दूर रहने और सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।उन्होंने चम्बा में आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय अंडर -19 मेजर गेम्स में जिला सोलन का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को विशेष कर नशे के प्रति जागरूक किया ।
कार्यक्रम में नशे से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध कानूनी सहायता नशा उन्मूलन और नशामुक्त भारत के उद्देश्य के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि नशे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता समय पर सहायता और सामाजिक सहयोग जरूरी है।
कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में नशे से संबंधित 1900 से अधिक प्राथमिकी एफआईआर दर्ज हुईं। जिनमें 2800 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में 110 महिलाएं भी शामिल थीं। जनवरी से मई 2026 तक 950 से अधिक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा प्रदेश की 244 पंचायतों को नशे के लिहाज से रेड कैटेगरी में रखे जाने का उल्लेख किया गया।
नशे के कारोबार से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए बताया गया कि प्रदेश में 17 मामलों में करीब 41 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों से जुड़े नशे के मामलों पर भी चिंता व्यक्त की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि नशीले पदार्थों का सेवन मस्तिष्क, हृदय, लिवर, गुर्दे और फेफड़ों सहित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके दुष्प्रभाव लंबे समय बाद भी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकते हैं। नशीले पदार्थों की अधिक मात्रा लेने से जान भी जा सकती है। विद्यार्थियों को गलत संगति से बचने तथा खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में मोटर वाहन अधिनियम 1988 और उसमें किए गए संशोधनों के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, यातायात संकेतों का पालन करने और नाबालिग अवस्था में वाहन नहीं चलाने के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि यातायात नियमों की अनदेखी सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। नियमों का पालन करके कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रताप सिंह रानौट ने न्यायिक अधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रतिदिन सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के बारे में जानकारी दी जाती है। विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यक्रम से मिली जानकारी विद्यार्थी अपने जीवन में अपनाएंगे और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी जागरूक करेंगे। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले शिक्षकों का भी धन्यवाद किया।
इस अवसर पर सीएचटी रमेश शर्मा सहित विद्यालय के शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने यातायात नियमों का पालन करने और कानून के प्रति जागरूक बनाना रहा।






