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अर्की में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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अर्की

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में एमसीएच अर्की में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं अन्य उपस्थित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन तथा मानसिक समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के प्रति जागरूक करना था।

यह जागरूकता कार्यक्रम डॉ. मुक्ता रस्तोगी, खंड चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल अर्की के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर डॉ. विजय कुमार शांडिल, काउंसलर, एचआईवी परामर्श एवं परीक्षण सेवाएं, सिविल अस्पताल अर्की, जिला सोलन ने उपस्थित गर्भवती महिलाओं एवं अन्य प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. विजय कुमार शांडिल ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है। जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी बेहद जरूरी है। आज की व्यस्त जीवनशैली, पारिवारिक परिस्थितियां, आर्थिक चिंताएं, काम का दबाव तथा भविष्य को लेकर अनिश्चितता कई बार तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में समस्याओं को छिपाने के बजाय परिवार के सदस्यों, मित्रों अथवा स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बात करना लाभदायक होता है।

उन्होंने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान शारीरिक बदलावों के साथ भावनात्मक एवं मानसिक बदलाव भी हो सकते हैं। इस समय परिवार का सहयोग, पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद, हल्का व्यायाम तथा नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हैं। गर्भवती महिलाओं को अपनी चिंताओं और भावनाओं को खुलकर साझा करना चाहिए। यदि लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, नींद में परेशानी या किसी भी गतिविधि में रुचि कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो स्वास्थ्य कर्मियों से परामर्श लेना चाहिए।

उन्होंने यह भी समझाया कि मानसिक बीमारी किसी कमजोरी का संकेत नहीं है और न ही इससे पीड़ित व्यक्ति के साथ भेदभाव किया जाना चाहिए। समय पर पहचान, उचित परामर्श, आवश्यक उपचार तथा परिवार के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रभावी प्रबंधन संभव है। लोगों को दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनने, जरूरतमंद व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील रहने तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों और सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों को स्वस्थ दिनचर्या अपनाने, योग एवं ध्यान करने, नियमित शारीरिक गतिविधियां बनाए रखने और तनाव की स्थिति में उचित सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से अपील की गई कि वे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं तथा जरूरत पड़ने पर स्वयं और दूसरों के लिए समय पर सहायता प्राप्त करने को प्राथमिकता दें। इस जागरूकता गतिविधि के माध्यम से कुल 63 लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाया गया।इस अवसर पर सपना ठाकुर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने गर्भवती महिलाओं तथा धात्री माताओं को स्तनपान के बारे में जानकारी दी की 6 महीने तक शिशु को केवल स्तनपान ही करवाना चाहिए! 6 महीने का स्तनपान बच्चों के लिए अमृत के समान होता है जिससे बच्चे का सुरक्षा तंत्र मजबूत होता है तथा उसे किसी तरह का रोग आसानी से नहीं लगता!

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