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क्या सरकार द्वारा व्यवस्था परिवर्तन मे प्रदेश के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशककार्यकारी ही नियुक्त नियुक्त किए जाते हैं ।

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कुनिहार
आज दिनांक 8 अप्रैल 2026 को पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन सोलन के संयोजक व वरिष्ठ मुख्य सलाहकार धनीराम तनवर श्यामलाल ठाकुर सतपाल शर्मा नेकीराम पुष्पा सूद नागेंद्र ठाकुर दीप राम ठाकुर रतिराम शर्मा लेखराम काईथ संतराम चंदेल पतराम निर्मल ठाकुर जसबीर सिंह चमन लाल बीना देवी वेद ठाकुर प्रेम कंवर एवं समस्त कार्यकारी ने सरकार को पहले भी लिखित में आग्रह किया था कि पहले की सरकारों में जो प्रदेश के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक जैसे उच्च पदों के अधिकारियों को कार्यकारी की नियुक्ति किसी कार्य वश कुछ समय के लिए दी जाती थी मगर इस सरकार में कुछ महीने पहले मुख्य सचिव कार्यकारी ही नियुक्त किए गए वह पुलिस विभाग जो एक संवेदनशील पद होता है जिसकी पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था व शांति बनाए रखने की जिम्मेवारी होती है और भी बहुत से निर्णय उन्हें एक स्थाई डीजीपी होने के नाते करने पड़ते हैं मगर इस पद पर बैठे यह अधिकारी कार्यकारी होने के नाते व पुलिस महानिदेशक जैसे उच्च अधिकारी को भी कार्यकारी नियुक्त किया गया है यह समझ से परे है या हो सकता है कि इस सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन एक नया फार्मूला निकाल कर इन उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को हमेशा के लिए कार्यकारी नियुक्त किया गया है जिसके कारण यह अधिकारी अपने तौर पर कोई बड़ा निर्णय लेने में अपने को सक्षम नहीं समझते क्योंकि जब भी किसी प्रकार की जरूरी मांग संगठन द्वारा की जाती है तो उसका निर्णय इसी कारण नहीं होता मुख्यमंत्री महोदय से आग्रह है कि इस मांग को गंभीरता से ले और वर्तमान में जो पुलिस महानिदेशक इस पद पर आसीन है उन्हें कार्यकारी पुलिस महानिदेशक के तौर पर कार्य कर रहे हैं उनके आदेश नियमित स्थाई पर किया जाए ताकि पुलिस विभाग वह पुलिस पेंशनरों की समस्याओं को करने व उचित फैसला लेने के लिए सक्षम हो क्योंकि पुलिस पेंशनर की कुछ ऐसी मांगे हैं जो उनके अधिकार क्षेत्र में है लेकिन देखा जाता है कि समाचार पत्रों में इन्हें भी कार्यकारी पुलिस महानिदेशक लिखा जाता है जिसके कारण पुलिस विभाग वह संगठन में शंका रहती है। संगठन यह भी मांग करती है कि पहले सरकारों में जब भी कोई मांग पत्र सरकार को भेजा जाता था तो उस पर की गई कार्रवाई की सूचना संगठन को सूचना दी जाती थी मगर मौजूदा सरकार में यह प्रचलन बंद कर दिया है जबकि जो भी मांग की जाती है उस पर जो फैसला या कार्रवाई जो की जाती है उसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय से संगठन को भी पहले की तरह आनी जरूरी है ताकि उन्हें पता चले की इस मांग पर क्या कार्रवाई की गई है।

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