दाड़लाघाट:- लाल झंडा सीमेंट प्लांट वर्कर यूनियन बागा के नेतृत्व में शालूघाट में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया। प्रदर्शन का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं का विरोध था। मजदूरों का आरोप है कि 8 मई से लागू की गई ये श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इससे श्रमिकों के अधिकार प्रभावित होंगे। धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन के महासचिव बलवीर चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समाप्त किए गए 44 श्रमिक कानूनों को दोबारा लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताओं के तहत 29 कानून सीधे तौर पर खत्म कर दिए गए हैं, जिससे मजदूरों के जीवन और अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मजदूरों के हड़ताल करने और यूनियन बनाने के अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं। फिक्स टर्म जैसे कानूनों से भी श्रमिकों के भविष्य पर असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में सीटू तथा अन्य 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है और इसे मांग दिवस के रूप में भी मनाया जा रहा है। बलवीर चौहान ने यूटीसीएल कंपनी प्रबंधन को भी चेतावनी देते हुए कहा कि मजदूरों की लंबित मांगों को समय रहते पूरा किया जाए, अन्यथा बागा यूनियन अपने आंदोलन को और तेज करेगी।
यूनियन के प्रधान गणपत राम ने कहा कि मजदूरों की कई मांगें पिछले तीन-चार वर्षों से लंबित हैं। यदि इन्हें जल्द पूरा नहीं किया गया तो सभी मजदूर मिलकर आंदोलन की नई रूपरेखा तैयार करेंगे और कंपनी का कार्य बंद करने तक का निर्णय लिया जा सकता है।
धरना-प्रदर्शन में लाल मन, संजय कुमार, बालक राम, रूप लाल, तिलक राज, नंद लाल, रोहित, प्रवीण कुमार, पासवान और शिव कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।






