दाड़लाघाट:- राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट से कॉमर्स संकाय को समाप्त किए जाने के सरकारी फैसले को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और छात्रों ने इस निर्णय को विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दाड़लाघाट कॉलेज क्षेत्र की लगभग 20 से 25 पंचायतों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए यह कॉलेज शिक्षा का एक सुलभ और महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। उनका कहना है कि कॉमर्स संकाय बंद होने से विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को नुकसान होगा जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करने में सक्षम नहीं हैं। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव छात्राओं पर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर भेजना आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से कई परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में कॉमर्स संकाय बंद होने से कई छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों में राकेश गौतम, जगदीश्वर शुक्ला, ओमप्रकाश शर्मा, श्याम चौधरी, हेमराज गौतम, कमल ठाकुर, पवन गौतम, विकास शर्मा, पवन शर्मा, चेतराम शर्मा, कृष्ण चंद भट्टी, देवेंद्र कुमार, नरेश कुमार, बंटू शुक्ला, बसंत सिंह ठाकुर, हीरालाल, नरेंद्र शर्मा, नरेंद्र हांडा, भीम शर्मा, हरीश कुमार, अंकु महाजन, महेंद्र ठाकुर सहित अन्य लोगों ने सरकार और शिक्षा विभाग से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने तथा जनहित में कॉमर्स संकाय को पुनः शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुविधाओं को बढ़ाने की आवश्यकता है, न कि उन्हें कम करने की। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही अपना फैसला वापस नहीं लिया तो छात्रों के हितों की रक्षा के लिए क्षेत्र के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।






