सोलन/परवाणू पवन सिंघ:-
परवाणू नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव ने सोमवार को अचानक बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया, जब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने पूरे राजनीतिक समीकरण को पलट कर रख दिया। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि नगर परिषद की सत्ता का फैसला केवल वोटों से नहीं, बल्कि किस्मत से भी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 4 जून के आदेश पर रोक लगाते हुए साफ किया है कि नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी मतदान कर सकेंगे। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम हाईकोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे। परवाणू नगर परिषद में मौजूदा स्थिति भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर वाली बन चुकी है। नगर परिषद में भाजपा के 5 पार्षद और कांग्रेस के 4 पार्षद हैं। पहले भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा था, लेकिन सुप्रीम Court के आदेश के बाद स्थानीय कांग्रेस विधायक के वोट के शामिल होने से कांग्रेस का आंकड़ा भी 5 तक पहुंच गया। अब दोनों दल 5-5 की बराबरी पर खड़े हैं। यही बराबरी अब पूरे चुनाव को रोमांचक बना रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि यदि दोनों दल अपने-अपने वोट सुरक्षित रखते हैं तो मुकाबला बराबरी पर अटक सकता है। ऐसी स्थिति में चुनावी नियमों के तहत फैसला टॉस, लॉटरी या पर्ची प्रणाली से भी किया जा सकता है। यानी नगर परिषद की सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठने वाला चेहरा राजनीतिक ताकत के साथ-साथ किस्मत का भी धनी हो सकता है। शहर में इस चुनाव को लेकर जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं और दावे जरूर चल रहे हैं, लेकिन कानूनी स्थिति फिलहाल साफ है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल अंतरिम राहत दी है। विधायक के मतदान अधिकार को बहाल किया गया है, जबकि अंतिम निर्णय अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेगा।अब सबकी निगाहें परवाणू नगर परिषद के चुनावी दिन पर टिकी हैं, जहां वोट पूरे खेल को बदल सकता है और बराबरी की स्थिति में “लकी ड्रॉ” जैसा नजारा भी देखने को मिल सकता है। राजनीतिक रणनीति, जोड़-तोड़ और किस्मत… तीनों की परीक्षा अब एक साथ होने वाली है।






