गोयला पवन सिंघ:-
दून विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत गोयला में लाखों रुपये की लागत से निर्मित पटवारी भवन आज गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस भवन का बड़े स्तर पर उद्घाटन कर विकास का दावा किया गया था, उसकी वर्तमान स्थिति देखकर ग्रामीण हैरान हैं। भवन के भीतर पानी, कीचड़ और मिट्टी जमा होने से हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग इसे पटवारी भवन कम और दलदल ज्यादा कहने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उद्घाटन की जल्दबाजी में निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया। भवन के पीछे और आसपास सुरक्षा दीवार तथा उचित जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई गई, जिसका खामियाजा आज पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। बरसात का पानी सीधे भवन में घुस रहा है और सरकारी संपत्ति बदहाली की शिकार हो रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन पूरी तरह तैयार नहीं था तो उसका उद्घाटन क्यों किया गया? क्या केवल फीता काटने और नामपट्टिका लगाने के लिए जनता के लाखों रुपये दांव पर लगा दिए गए? यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुसार हुआ था तो उद्घाटन के कुछ ही समय बाद भवन की यह दुर्दशा कैसे हो गई? स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि पटवारी कार्यालय को भी भवन छोड़कर पंचायत घर में चलाना पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस निर्माण कार्य की निगरानी किसने की, गुणवत्ता की जांच किसने की और जनता के पैसे की जवाबदेही कौन लेगा?क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि निर्माण कार्य में लापरवाही, तकनीकी खामियां या अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित विभाग, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर केवल उद्घाटन नहीं, बल्कि टिकाऊ और उपयोगी निर्माण होना चाहिए।
अब सवाल जनता का है— क्या इस पटवारी भवन में सरकारी काम होगा या फिर बरसात के मौसम में धान की खेती?






