पट्टा महलोग (सोलन) पवन सिंघ:-
क्या हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ सरकारी फाइलों और भाषणों तक सीमित रह गई है? जिला सोलन के पट्टा महलोग में सामने आई एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति अस्पताल पहुंचा, लेकिन वहां न डॉक्टर मिला, न एक्स-रे की सुविधा काम आई और न ही मरीज को रैफर करने के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध हुई। बडैहरी निवासी भागी राम सड़क किनारे खून से लथपथ और बेसुध हालत में पड़े मिले। स्थानीय लोगों ने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें तत्काल पट्टा सीएचसी पहुंचाया, लेकिन अस्पताल की हालत देखकर हर कोई हैरान रह गया। आपातकालीन स्थिति के बावजूद अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। घायल को जरूरी उपचार तक नहीं मिल सका। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन होने के बावजूद उसे चलाने वाला कोई तकनीशियन नहीं है। यानी करोड़ों की मशीन सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है। वहीं जब मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे बड़े अस्पताल भेजने की जरूरत पड़ी तो अस्पताल में एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी। आखिरकार एक स्थानीय व्यक्ति प्रदीप ठाकुर अपनी निजी गाड़ी लेकर आगे आए और घायल को बद्दी अस्पताल पहुंचाया। यदि स्थानीय लोग मदद के लिए आगे न आते तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे।घटना के बाद लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास और व्यवस्था परिवर्तन के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजू भाई ( आपकी आवाज़ पट्टा महलोग ) ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, तो दूरदराज के क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है। अब सवाल यह है कि यदि किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला के साथ ऐसी स्थिति पैदा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार और स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं? पट्टा महलोग की यह घटना केवल एक अस्पताल की कहानी नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह तस्वीर है। क्षेत्र की जनता अब जवाब मांग रही है—आखिर कब तक लोगों की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा?






