अर्की, शहनाज।
“दादाजी चले, पिता चले, अब बेटों का सफर छिना” — अर्की क्षेत्र में रामपुर डिपो की ऐतिहासिक प्रेम नगर–बातल बस सेवा बंद होने के बाद लोगों की जुबान पर यही चर्चा है। करीब तीन से चार दशक से लगातार चल रही इस बस सेवा को अचानक बंद किए जाने से क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह बस केवल एक परिवहन साधन नहीं थी, बल्कि बातल, देवरा, मंजयाट पाट्टी और आसपास की पंचायतों की जीवनरेखा थी। छात्र, कर्मचारी, बुजुर्ग, किसान और व्यापारी वर्षों से इसी बस पर निर्भर रहे हैं। बस के बंद होने से जहां लोगों के शिमला और अन्य स्थानों तक पहुंचने में परेशानी बढ़ गई है, वहीं किसानों की सब्जियों और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी छिन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा इस रूट को कम आय वाला बताना वास्तविकता से परे है। लोगों के अनुसार बस में प्रतिदिन अच्छी संख्या में यात्री सफर करते थे और वर्षों तक लगातार चलने वाली सेवा को घाटे का सौदा बताना जनता की समझ से परे है। यही कारण है कि अब इस निर्णय को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिस बस में बैठकर तीन पीढ़ियों ने स्कूल, कॉलेज और नौकरी तक का सफर तय किया, उसका बंद होना केवल एक रूट का बंद होना नहीं बल्कि क्षेत्र की एक ऐतिहासिक पहचान का समाप्त होना है। लोगों का मानना है कि सरकार और विभाग को जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
अब प्रभावित पंचायतों के लोगों ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और स्थानीय विधायक से मांग की है कि प्रेम नगर–बातल–मंजयाट पाट्टी–देवरा बस सेवा को तुरंत बहाल किया जाए, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके और सरकार के प्रति जनता का विश्वास बना रहे।
विभाग का पक्ष
रामपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक उमेश ठाकुर का कहना है कि बसों की कमी के चलते इस रूट को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।






