अर्की:-
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर सिविल अस्पताल अर्की में आशा कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक करना तथा समाज में नेत्रदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना रहा।

कार्यक्रम का आयोजन खंड चिकित्सा अधिकारी अर्की, जिला सोलन, डॉ. मुक्ता रस्तोगी के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर डॉ. विजय कुमार शांडिल, काउंसलर, एचआईवी काउंसलिंग एवं टेस्टिंग सर्विसेज, सिविल अस्पताल अर्की, जिला सोलन ने आशा कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के उद्देश्य, नेत्रदान की आवश्यकता तथा इसके सामाजिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
डॉ. विजय कुमार शांडिल ने बताया कि नेत्रदान एक महान सामाजिक कार्य है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखों के कॉर्निया का उपयोग दृष्टिबाधित व्यक्ति को दृष्टि प्रदान करने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है, क्योंकि समाज में अभी भी नेत्रदान को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां और गलत धारणाएं मौजूद हैं। सही जानकारी के माध्यम से इन भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।
उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दें तथा उन्हें समझाएं कि मृत्यु के बाद नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकता है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पहुंच होने के कारण वे स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को यह भी बताया गया कि नेत्रदान के संबंध में लोगों को वैज्ञानिक एवं प्रमाणित जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेत्रदान मृत्यु के बाद किया जाने वाला परोपकारी कार्य है और इसके लिए परिवार की सहमति तथा निर्धारित स्वास्थ्य प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। लोगों को यह संदेश दिया गया कि नेत्रदान के संबंध में किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम पर विश्वास न करें तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग से सही जानकारी प्राप्त करें।
आशा कार्यकर्ताओं के साथ समूह चर्चा भी की गई, जिसमें नेत्रदान से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यकर्ताओं ने समुदाय में जागरूकता फैलाने के दौरान आने वाली संभावित समस्याओं और लोगों की शंकाओं के बारे में चर्चा की। डॉ. शांडिल ने उनकी शंकाओं का समाधान करते हुए उन्हें सरल भाषा में लोगों तक सही संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में सुपरवाइजर भूषण वर्मा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित की तथा कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में सहयोग किया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि नेत्रदान केवल चिकित्सा से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दूसरे व्यक्ति के जीवन में दृष्टि की नई उम्मीद पैदा हो सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नेत्रदान के महत्व को समझना चाहिए और अपने परिवार एवं समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी आशा कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े, 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 के दौरान अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करें। साथ ही लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही प्रमाणित जानकारी के आधार पर नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का प्रयास करें।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि “नेत्रदान महादान है—किसी के जीवन में रोशनी लाने के लिए आगे आएं और समाज को नेत्रदान के प्रति जागरूक बनाएं।”






