कुनिहार
बी.एल. सेंट्रल पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार में अध्यापक दिवस बड़े हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं शिक्षा जगत से जुड़ी विशिष्ट हस्तियों ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त केंद्र मुख्याध्यापिका बिमला शर्मा, सेवानिवृत्त केंद्र मुख्याध्यापिका तुलसी गुप्ता, सेवानिवृत्त प्रवक्ता हिंदी जयंती शर्मा तथा सेवानिवृत्त स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी रेखा गुप्ता उपस्थित रहीं।
विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा एवं समस्त स्टाफ ने सभी विशिष्ट अतिथियों का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मीरा कौशल ने किया तथा उन्होंने अतिथियों का समारोह में पधारने पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। इसके पश्चात माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा महान शिक्षाविद् एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से कार्यक्रम का आगाज हुआ। इसके उपरांत विद्यार्थियों ने हिमाचली नाटी, भांगड़ा, गिद्दा, भजन, भाषण एवं लघु नाटिका के माध्यम से गुरु की महिमा एवं शिक्षक-शिष्य के पवित्र संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। सदनों की प्रभारी शिवानी शर्मा ने बताया कि अध्यापक दिवस के उपलक्ष्य में विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा एवं मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने सभी विशिष्ट अतिथियों को हिमाचली टोपी, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। विद्यालय अध्यक्ष ने अतिथियों का समारोह में पधारने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अध्यापक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
समारोह के दौरान विद्यालय अध्यक्ष ने विद्यालय के समस्त अध्यापक एवं गैर-अध्यापक वर्ग को भेंट देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पी.टी.ए. सदस्य, शिक्षक वर्ग एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए मिष्ठान की विशेष व्यवस्था की गई। समारोह ने विद्यालय परिसर में गुरु-शिष्य के सम्मान, संस्कार और समर्पण की भावना को और अधिक मजबूत किया।






