कुनिहार
प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में श्रीरामलीला जनकल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास अरुणानंद आनंद ने श्रद्धालुओं को भगवान के विभिन्न अवतारों के साथ ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। भगवान की भक्ति दृढ़ संकल्प और विश्वास के बल पर कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने राजा उत्तानपाद और उनके पुत्र ध्रुव की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव को अपनी सौतेली माता के कटु वचनों से गहरा आघात लगा। इसके बाद उन्होंने भगवान को प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय किया और वन में जाकर कठोर तपस्या शुरू कर दी। ध्रुव की अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद प्रदान किया।
कथा व्यास ने कहा कि ध्रुव भले ही बालक थे लेकिन उनके मन में भगवान को पाने का संकल्प अटल था। इसी दृढ़ संकल्प के कारण उन्हें भगवान का साक्षात्कार हुआ और वे ध्रुव पद को प्राप्त हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि आज के भौतिक जीवन में मनुष्य सुख और शांति के लिए भटक रहा है। जबकि वास्तविक आनंद भगवान के नाम सत्संग और सदकर्मो में है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं बल्कि मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा दिखाने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है। इसके श्रवण से मन में भक्ति और सद्भाव की भावना जागृत होती है।
कथा के दौरान व्यास ने जय जय राधा रमण हरि बोल भजन पर सभी श्रद्धालुओं को मंत्र मुग्ध किया। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।






