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फ़ावां में प्रवासी श्रमिकों को एचआईवी/एड्स के प्रति कियाजागरूक

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अर्की

स्वास्थ्य विभाग अर्की द्वारा चलाए जा रहे एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान 3.0 के अंतर्गत 12 सितंबर 2026 को फवां गांव के आसपास रह रहे प्रवासी श्रमिकों को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक किया गया। यह अभियान 12 अगस्त 2026 से 12 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों तक एचआईवी/एड्स से संबंधित सही एवं वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना, संक्रमण से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना तथा आवश्यकता पड़ने पर समय पर एचआईवी जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करना है।

यह जागरूकता कार्यक्रम डॉ. मुक्ता रस्तोगी, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, अर्की, जिला सोलन के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. विजय कुमार शांडिल, काउंसलर, एचआईवी काउंसलिंग एवं टेस्टिंग सर्विसेज, सिविल अस्पताल अर्की ने प्रवासी श्रमिकों को एचआईवी/एड्स के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

डॉ. विजय कुमार शांडिल ने बताया कि एचआईवी एक ऐसा संक्रमण है जिसके संबंध में आज भी समाज में कई प्रकार की भ्रांतियां एवं गलत धारणाएं मौजूद हैं। सही जानकारी और सावधानी के माध्यम से एचआईवी संक्रमण से बचाव संभव है। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों को समझाया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ सामान्य सामाजिक व्यवहार करने, हाथ मिलाने, साथ बैठने, भोजन करने, गले मिलने, एक ही कमरे में रहने या मच्छर के काटने से एचआईवी नहीं फैलता है। इसलिए एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति के साथ भेदभाव करने के बजाय उसे सहयोग एवं सम्मान देना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान एचआईवी संक्रमण के प्रमुख मार्गों के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त या रक्त से बने उत्पादों का उपयोग, संक्रमित सुई अथवा सिरिंज का साझा उपयोग तथा संक्रमित मां से बच्चे में संक्रमण का जोखिम हो सकता है। इसलिए सभी को सुरक्षित व्यवहार अपनाने, नशीली दवाओं के लिए इस्तेमाल होने वाली सुई-सिरिंज को साझा न करने तथा आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रवासी श्रमिकों को विशेष रूप से एचआईवी की समय पर जांच के महत्व के बारे में बताया गया। उन्हें समझाया गया कि केवल किसी लक्षण के आधार पर एचआईवी संक्रमण का पता नहीं लगाया जा सकता। यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण का जोखिम रहा हो तो उचित समय पर एचआईवी जांच करवाना महत्वपूर्ण है। जांच एवं परामर्श सेवाएं गोपनीय रखी जाती हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उचित मार्गदर्शन एवं सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं।

डॉ. शांडिल ने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होती है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान समय में प्रभावी एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी उपलब्ध है, जिसके नियमित उपयोग से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ एवं सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने सभी श्रमिकों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें तथा अपने परिवार, मित्रों और अन्य साथियों को भी एचआईवी/एड्स के प्रति सही जानकारी दें।

कार्यक्रम में प्रवासी श्रमिकों ने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना और एचआईवी/एड्स से बचाव एवं जांच के महत्व को समझा। उन्हें यह संदेश दिया गया कि “जानकारी ही एचआईवी से बचाव की पहली सीढ़ी है।”

स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान 3.0 के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं तथा अन्य संवेदनशील समूहों तक पहुंच बनाई जाए, ताकि एचआईवी के प्रति जागरूकता बढ़े, समय पर जांच को प्रोत्साहन मिले और संक्रमण की रोकथाम के साथ-साथ एचआईवी से प्रभावित लोगों के प्रति भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

संदेश:
“एचआईवी से बचाव संभव है—सही जानकारी अपनाएं, सुरक्षित व्यवहार करें और आवश्यकता होने पर एचआईवी की जांच करवाएं।”

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