दाड़लाघाट:-
नम्होल के गांव टेपरा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ समापन हो गया। यह आयोजन माता नैना देवी जी के आशीर्वाद से तथा स्वर्गीय कौशल्या शर्मा की पुण्य स्मृति में सम्पन्न हुआ। कथा का प्रवचन कथावाचक मदन शांडिल्य जिला बिलासपुर द्वारा किया गया। उन्होंने सात दिनों तक श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म, भक्ति और जीवन के गूढ़ तत्वों का सरल एवं प्रभावी वर्णन किया। आयोजक जगत शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ 30 अप्रैल को कलश यात्रा एवं भागवत स्वागत के साथ हुआ। 01 मई से 05 मई तक प्रतिदिन कथा प्रवचन हुआ। समापन दिवस 06 मई को प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अंतिम कथा प्रवचन के उपरांत विधिवत आरती की गई तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा के दौरान प्रवचन करते हुए कथावाचक मदन शांडिल्य ने कहा कि मनुष्य को जीवन में रूप, यौवन, शक्ति (प्रभुत्व) और पद प्राप्त होते हैं, लेकिन यदि इनके साथ विवेक न हो, तो यही गुण उसके पतन का कारण बन जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विवेक न पढ़ाई से आता है, न बादाम खाने से और न ही डिग्रियों से, डिग्रियां ज्ञान तो दे सकती हैं, परंतु सही और गलत का निर्णय करने की क्षमता अर्थात विवेक अलग विषय है। उन्होंने आगे कहा कि जिसके पास ये चारों हैं और विवेक नहीं, उसकी दुर्गति निश्चित है। साथ ही उन्होंने बताया कि विवेक प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग सत्संग है, बिन सत्संग विवेक न होई, अर्थात बिना सत्संग के मनुष्य को सही दिशा नहीं मिलती।आयोजन को सफल बनाने में समस्त शर्मा परिवार एवं क्षेत्रवासियों का सराहनीय योगदान रहा। आयोजकों सुख राम शर्मा, तुसली राम शर्मा, लेख राम शर्मा ओर जगत शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।






