दाड़लाघाट:- पंचायत दाड़लाघाट स्थित श्री बाडूबाड़ा देव प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के नवम दिवस पर कथावाचक आचार्य हरि जी महाराज ने भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव एवं प्रथम पूज्य बनने के दिव्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अपने प्रवचन में आचार्य हरि जी महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना कर उसे द्वारपाल नियुक्त किया था। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो गणेश जी ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। इसके बाद हुए घटनाक्रम में भगवान शिव द्वारा गणेश जी का सिर अलग कर दिया गया। माता पार्वती के विलाप और देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने हाथी का सिर लगाकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया तथा उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। आचार्य हरि जी महाराज ने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभता के प्रतीक हैं। किसी भी शुभ कार्य से पूर्व उनकी पूजा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि गणेश जी का जीवन हमें माता-पिता की आज्ञा का पालन, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान गणेश के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म, संस्कार और परिवार के प्रति सम्मान रखने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।






