अर्की:-
उपमंडल अर्की की ग्राम पंचायत देवरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम खालसा पाटी में पेयजल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। गांव के निवासी लायक राम सहित अन्य ग्रामवासियों ने जलशक्ति विभाग अर्की के एक कर्मचारी की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लिए बने उठाऊ पेयजल योजना के टैंक में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद लोगों को मात्र एक घंटे के लिए ही जलापूर्ति की जाती है। इससे ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस समय ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं, उसी समय टैंक का पानी लगातार ओवरफ्लो होकर व्यर्थ बहता रहता है, जिससे हजारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस कर्मचारी को टैंक संचालन और जलापूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह स्वयं कभी टैंक पर नहीं आता। उसके स्थान पर उसके परिवार के सदस्य ही पानी छोड़ने का कार्य करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब से उक्त कर्मचारी की इस योजना पर ड्यूटी लगी है, तब से यही स्थिति बनी हुई है। गांववासियों ने बताया कि उन्होंने टैंक से ओवरफ्लो होकर बह रहे पानी की वीडियो और शिकायत संबंधित अधिकारियों को भेजी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर जल संरक्षण और “हर घर जल” जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि दूसरी ओर विभागीय लापरवाही के चलते कीमती पेयजल सड़कों और नालों में बह रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब टैंक में पानी भरपूर है तो फिर ग्रामीणों को पर्याप्त जलापूर्ति क्यों नहीं मिल रही?
अधिशासी अभियंता ने दिए जांच के संकेत
इस संबंध में जब अधिशासी अभियंता जलशक्ति विभाग अर्की, ई. विवेक कटोच से बात की गई तो उन्होंने कहा कि,
“वीडियो और शिकायत को देखकर संबंधित एसडीओ को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे।”
अब ग्रामीणों की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का सीधा सवाल
“जब टैंक का पानी ओवरफ्लो होकर बह रहा है तो फिर खालसा पाटी के लोगों को केवल एक घंटे की जलापूर्ति क्यों?”






