अर्की शहनाज:-
उपमंडल मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल अर्की में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में करीब ढाई माह से नेत्र रोग विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) का पद रिक्त है, जबकि ऑप्थाल्मिक असिस्टेंट का पद पिछले लगभग तीन वर्षों से खाली पड़ा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि हजारों लोगों को प्रभावित करने वाली इस समस्या के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि आंखों के मरीजों को अब इलाज के लिए सोलन और शिमला के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। पहले अर्की अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ मरीजों की जांच कर जिला अस्पताल सोलन में ऑपरेशन की व्यवस्था करवाते थे, लेकिन विशेषज्ञ के अभाव में यह सुविधा लगभग ठप पड़ गई है। स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि अस्पताल में चश्मे का नंबर जांचने वाला ऑप्थाल्मिक असिस्टेंट भी नहीं है। नतीजतन बच्चों, बुजुर्गों और आम मरीजों को साधारण नेत्र परीक्षण के लिए भी निजी क्लीनिकों या दूसरे अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन अर्की अस्पताल में नेत्र सेवाओं का हाल बद से बदतर होता जा रहा है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और स्थानीय विधायक संजय अवस्थी से मांग की है कि अस्पताल में जल्द से जल्द नेत्र रोग विशेषज्ञ और ऑप्थाल्मिक असिस्टेंट की नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
उधर, बीएमओ अर्की डॉ. मुक्ता रस्तोगी का कहना है कि रिक्त पदों के संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करवा दिया गया है और नियुक्तियों के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है






