कुनिहार
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति में शामिल प्रदेश के 18 राज्य स्तरीय पेंशन संगठनों ने कहा है कि संयुक्त संघर्ष समिति पिछले एक वर्ष से प्रदेश के पेंशनरों की विभिन्न लंबित देनदारियों और प्रमुख मांगों को लेकर सरकार के साथ लगातार संघर्ष करती रही है।
यहां आयोजित प्रेस वार्ता में संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर के नेतृत्व में पिछले एक वर्ष के दौरान ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर पर अनेक धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए। गत वर्ष नवंबर में धर्मशाला तथा मार्च 2026 में शिमला में राज्य स्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन किए गए, जिनमें प्रदेश भर से हजारों पेंशनरों ने भाग लिया। इन आंदोलनों के परिणामस्वरूप सरकार को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ वार्ता करनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि 13 मई को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में समिति के 14 सूत्रीय मांगपत्र पर विस्तृत चर्चा हुई थी। बैठक में सरकार ने कई मांगों को सिद्धांततः स्वीकार करते हुए उनके क्रियान्वयन के लिए 31 जुलाई तक का समय मांगा था।
शर्मा ने कहा कि 14 सूत्रीय मांगपत्र में शामिल छह प्रमुख मांगों पर सरकार ने सकारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। वर्ष 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों की लंबित देनदारियों का भुगतान किया जा चुका है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की सभी देनदारियां भी जारी कर दी गई हैं। शहरी निकायों के कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए वर्ष 2016 के संशोधित वेतनमान के आधार पर वेतन और पेंशन के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्रत्येक माह 10 तारीख से पहले पेंशन देने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है तथा पहली बार इस माह 9 जुलाई को उनके खातों में पेंशन जमा कर दी गई। इसके अतिरिक्त उनके चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए अलग से 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
प्रदेश के विभिन्न विभागों में पिछले लगभग ढाई वर्षों से लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए सरकार द्वारा 103 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं तथा सभी विभागों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
संघर्ष समिति ने सरकार से यह भी मांग की कि कॉरपोरेशन एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों और पेंशनरों को भी 1999 के आधार पर पेंशन का लाभ प्रदान किया जाए।
इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति के अथक प्रयासों से जब पेंशनरों की मांगें स्वीकार हो रही हैं और लंबित देनदारियों का भुगतान शुरू हुआ है, तभी कुछ “मुट्ठीभर स्वार्थी तत्व” स्वयं को पेंशनरों का हितैषी बताने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों का पेंशनरों के आंदोलनों में कोई योगदान नहीं रहा, बल्कि उन्होंने समय-समय पर संघर्ष समिति के आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया। यहां तक कि 13 मई को मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक को भी रद्द करवाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 90 प्रतिशत पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के साथ हैं और ऐसे अवसरवादी लोगों की वास्तविकता से भलीभांति परिचित हैं।
संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की कि 13 मई की बैठक में किए गए वादे के अनुसार 31 जुलाई तक जनवरी 2016 से जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त पेंशनरों की लंबित देनदारियों का 40 प्रतिशत भुगतान किया जाए तथा 15 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) की लंबित किस्तें भी जारी की जाएं।
शर्मा ने बताया कि संयुक्त संघर्ष समिति की प्रदेश स्तरीय बैठक अगस्त माह में अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी, जिसमें सरकार द्वारा मांगपत्र पर की गई कार्रवाई की समीक्षा कर आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
प्रेस वार्ता में ओमप्रकाश गर्ग, सुशील शर्मा, जगदीश चंदेल, राकेश शर्मा, कृष्ण चंद वर्मा तथा शिव रामपाल भी उपस्थित रहे।






