मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन की अदालत ने धारा 118 के उल्लंघन से जुड़े मामले में बड़ा आदेश दिया।
राजेश कुमार अरोड़ा और पुष्पा रानी अरोड़ा द्वारा बल्ह के चक्कर में खरीदी गई जमीन को राज्य सरकार में निहित करने के निर्देश दिए गए।
जमीन पर बने पेट्रोल पंप के ढांचे को भी सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया।
मामला विजिलेंस जांच के बाद सामने आया था।
वर्ष 1982 में नंद लाल अरोड़ा को सोलन के बासाल में मकान बनाने के लिए धारा 118 के तहत सीमित अनुमति मिली थी।
प्रशासन के अनुसार, यह अनुमति केवल विशिष्ट उद्देश्य के लिए थी और इससे उन्हें सामान्य कृषक का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ।
इसके बावजूद 1994 और 1996 में मंडी के दौंहदी, बगला और गुटकर में कृषि भूमि खरीदने का मामला सामने आया।
HPCL ने 2001 में 30 वर्ष की लीज के आधार पर पेट्रोल पंप स्थापित करने की दलील दी, लेकिन जिला कलेक्टर ने इसे स्वीकार नहीं किया।
आदेश में कहा गया कि मूल हस्तांतरण अवैध/शून्य होने पर उससे जुड़ी लीज और अन्य व्यावसायिक व्यवस्थाएं भी प्रभावित होती हैं।
SDM बल्ह को जमीन और ढांचे का कब्जा लेने, राज्य सरकार के पक्ष में इंतकाल दर्ज करने तथा मौके पर मौजूद सामान की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए।






