दाड़लाघाट। दाड़लाघाट स्थित अंबुजा सीमेंट लिमिटेड को दिए गए प्रतिष्ठित इकाई के दर्जे, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना योजना-1994 तथा स्थानीय रोजगार संबंधी दायित्वों के अनुपालन को लेकर विधानसभा में सवाल उठने के बाद मामला फिर चर्चा में आया है। नाचन के विधायक विनोद कुमार ने 31 अगस्त को तारांकित प्रश्न संख्या 4611 के माध्यम से उद्योग मंत्री से इस संबंध में जानकारी मांगी। सरकार ने विधानसभा में दिए लिखित उत्तर में बताया कि स्थानीय रोजगार संबंधी दायित्वों के अनुपालन को लेकर उद्योग विभाग को एक शिकायत अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है। इसकी जांच 31 जुलाई को उपायुक्त सोलन को सौंप दी गई है, लेकिन अभी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। सरकार के अनुसार उपायुक्त सोलन से रिपोर्ट मिलने के बाद ही तथ्यों के आधार पर मामले में आगामी
कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा में पूछे गए प्रश्न में विधायक ने सरकार से पूछा कि क्या अंबुजा सीमेंट लिमिटेड, दाड़लाघाट को दिए गए प्रतिष्ठित इकाई के दर्जे की शर्तों, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना योजना-1994 तथा स्थानीय रोजगार संबंधी दायित्वों के अनुपालन को लेकर शिकायतें, अभ्यावेदन और प्रस्तुतियां प्राप्त हुई हैं। यदि हां, तो सरकार की ओर से इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई है और वर्तमान स्थिति क्या है। विधायक ने यह भी पूछा कि क्या उद्योग विभाग, उपायुक्त, उपमंडलाधिकारी अथवा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी की ओर से इस मामले में जांच, सत्यापन या तथ्यों की जांच करवाई गई है। यदि जांच करवाई गई है तो क्या उसकी रिपोर्ट सरकार को प्राप्त हो चुकी है और उस पर क्या कार्रवाई की गई। प्रश्न में सरकार से यह भी पूछा गया कि क्या प्रतिष्ठित इकाई की स्वीकृति की शर्तों, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना योजना-1994 तथा स्थानीय रोजगार संबंधी दायित्वों के अनुपालन का स्वतंत्र परीक्षण करवाकर कारणयुक्त अंतिम आदेश पारित करने का विचार है। यदि हां, तो इसकी संभावित समय-सीमा क्या है। विधानसभा में सभा पटल पर रखी गई सूचना में सरकार ने जवाब दिया कि स्थानीय रोजगार संबंधी दायित्वों के अनुपालन के संबंध में एक शिकाय अभ्यावेदन विभाग को प्राप्त हुआ है। इसकी जांच उपायुक्त सोलन को 31 जुलाई 2026 को सौंप दी गई है तथा अभी रिपोर्ट अपेक्षित है। सरकार ने कहा कि उपायुक्त सोलन से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर मामले में आगामी कार्रवाई संभव होगी। वहीं प्रभावित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना परिवारों से जुड़े पक्ष का कहना है कि मामला केवल शिकायत या अभ्यावेदन तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि प्रतिष्ठित इकाई का दर्जा दिए जाने के समय उद्योग के समक्ष रोजगार से संबंधित शर्तें रखी गई थीं और इन शर्तों के आधार पर उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन एवं कर संबंधी लाभ मिलने की बात कही जाती रही है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस समय रोजगार संबंधी शर्तों की वास्तविक कानूनी और प्रशासनिक स्थिति क्या थी और उनका किस प्रकार पालन किया गया। प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि उनकी नियुक्तियां संविदा आधारित थीं, लेकिन सवाल केवल संविदा होने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारी वर्षों तक नियमित रूप से इकाई के काम, नियमित ड्यूटी और जनशक्ति व्यवस्था का हिस्सा रहे तो उन्हें उस रोजगार व्यवस्था से बाहर करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए। प्रभावित पक्ष के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी से लंबे समय तक नियमित कार्य लिया गया और वह इकाई की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा, तो बाद में केवल संविदा समाप्ति के आधार पर सेवा समाप्त करने के मामले में नियुक्ति से लेकर सेवा समाप्ति तक के पूरे अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि सेवा समाप्त करते समय निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। प्रभावित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना परिवारों से जुड़े पक्ष के अनुसार, मार्च 2026 से ही सरकार के विभिन्न स्तरों पर प्रतिवेदन देकर मामले में हस्तक्षेप और जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि मामला प्रशासनिक स्तर पर भी उठाया गया तथा उपमंडलाधिकारी और उपायुक्त स्तर पर कार्रवाई की मांग रखी गई, लेकिन मामला कई महीनों से लंबित रहा। प्रभावित पक्ष की मांग है कि प्रतिष्ठित इकाई से संबंधित मूल अभिलेख, इकाई को दिए गए दर्जे की शर्तें, रोजगार संबंधी दायित्व, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना योजना-1994 से संबंधित रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों की सूची तथा बाद में की गई स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और सेवा समाप्ति की कार्रवाई को एक साथ रखकर पूरे मामले की जांच की जाए। प्रभावित पक्ष का कहना है कि यदि किसी औद्योगिक इकाई को सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित रोजगार संबंधी शर्तों को पूरा करना था, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि उन शर्तों के तहत रोजगार पाने वाले कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करते समय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। फिलहाल सरकार के आधिकारिक उत्तर के अनुसार शिकायत अभ्यावेदन की जांच उपायुक्त सोलन के पास है और रिपोर्ट अभी अपेक्षित है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। अब प्रभावित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना परिवारों की नजर जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।






