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कुनिहार में पहली बार सजा विशाल कीर्तन दरबार: गुरु तेग बहादुर साहिब जी के प्रकाश पर्व पर गूँजी गुरबाणी

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कसौली पवन सिंघ

कुनिहार क्षेत्र में गुरु तेग बहादुर साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में इतिहास में पहली बार एक ‘विशाल कीर्तन दरबार’ का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक समागम ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और गुरुमय बना दिया, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह देखने को मिला।

पंज प्यारों की अगुवाई में शोभायात्रा

कार्यक्रम की शुरुआत पंज प्यारों की अगुवाई में हुई, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन सवारी को कुनिहार क्षेत्र के तालाब के पास लाया गया। सुबह के सत्र का आरंभ सरदार फौजा सिंह जी द्वारा किए गए ‘सुखमणि साहिब जी’ के पाठ से हुआ।

रागी जत्थों की मधुर वाणी से मंत्रमुग्ध हुई संगत

इस धार्मिक समागम में नामचीन रागी जत्थों ने अपनी मधुर वाणी और शब्द-कीर्तन से संगत को गुरु चरणों से जोड़ा:
भाई गुरदर्शन सिंह जी (कसौली वाले): इन्होंने अपने मधुर गायन से संगत को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। विशेष रूप से उनके द्वारा प्रस्तुत शब्द “चरण कमल तेरे धोय धोय पीवा” ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भाई तजेंद्र सिंह जी: उन्होंने अपनी रसीली कीर्तन शैली से उपस्थित भक्तों को निहाल किया।

  • *हजूरी रागी जत्था (तख्त श्री केशगढ़ साहिब): विशेष रूप से पधारे हजूरी रागी जत्थों ने गुरबाणी के अनमोल कीर्तन से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
    ‘हिंद की चादर’ के इतिहास से संगत हुई अवगत श्री आनंदपुर साहिब से पधारे भाई गुरदीप सिंह जी ने गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन और उनके महान बलिदान का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे गुरु साहिब ने पीड़ितों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और ‘हिंद की चादर’ कहलाए। उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वासों से दूर रहने और पूर्णतः गुरु पर भरोसा रखने का संदेश दिया।

अटूट लंगर और व्यवस्था

सुबह से ही चाय और पकौड़ों का लंगर शुरू हो गया था, जिसका संगत ने भरपूर आनंद लिया। दोपहर में अरदास के उपरांत अटूट लंगर बरताया गया। आयोजन में सरदार मंजीत सिंह और कसौली के राकेश कुमार जी का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में मुख्य रागी जत्थों और कथावाचकों को ‘हिंद की चादर’ प्रतीक चिह्न (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया गया।
समापन की अरदास भाई गुरदर्शन सिंह जी द्वारा की गई, जिसमें नगर और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की गई। कुनिहार की धरती पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना का एक अनूठा संदेश प्रसारित किया है।

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