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हिमकेयर केस में एफआईआर की तैयारी, विजिलेंस ब्यूरो की जांच तेज, पूछताछ को बुलाए हैल्थ सोसायटी के अफसर

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हिमाचल सरकार की कैशलेस इलाज वाली हिमकेयर योजना को लेकर विजिलेंंस ब्यूरो जल्द एफआईआर दर्ज कर सकता है। ब्यूरो ने इस मामले में जांच तेज कर दी है। स्वास्थ्य निदेशालय में इस योजना के लिए बनाई गई सोसायटी के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ हुई है। इन्हें पुलिस मुख्यालय ही बुलाया गया था। इसके बाद आईजीएमसी और टांडा से कुछ रिकार्ड लिया गया है। कुछ दस्तावेज अभी आना बाकी हैं। ये भी संभव है कि विजिलेंस टीमें खुद रिकार्ड सर्च करें। इसी के आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा। विजिलेंस को यह जांच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दी थी। सीएम ने विधानसभा में कहा था कि उन्होंने आईजीएमसी और टांडा का इंटरनल आडिट करवाया था। इन दोनों अस्पतालों में ही करीब 110 करोड़ का घपला होने का अंदेशा है। इसके बाद ही जांच विजिलेंस को दी गई थी। विजिलेंस ने इसके बाद इस योजना से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की है। सीएम ने पुरुषों की बच्चेदानी करने का रिकार्ड मिलने के बात कही थी, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दावा किया था कि ये बात सही नहीं है। महिलाओं की बच्चेदारी और पुरुषों के प्रोस्टेट का पैकेज हिमकेयर में एक ही है, इसलिए ये प्रचार किया जा रहा है।

हालांकि जांच में क्या तथ्य निकलते हैं, उससे सारी स्थिति साफ होगी। पूर्व भाजपा सरकार ने जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते हुए पहली जनवरी, 2019 को हिमकेयर योजना शुरू की थी, जिसमें राज्य के लोगों को सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपए तक का वार्षिक कैशलेस इलाज करवाने की सुविधा दी गई थी। एक कार्ड पर परिवार के अधिकतम पांच सदस्यों को लाभ देने का प्रविधान था। योजना उन परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई थी, जो केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं आते थे। बीपीएल, मनरेगा मजदूर और एकल महिलाओं के लिए यह मुफ्त है। अन्य के लिए 1000 रुपए का वार्षिक प्रीमियम था। योजना के दायरे में पांच लाख से अधिक परिवार शामिल किए जा चुके हैं, लेकिन अब ये योजना जांच के दायरे में है।

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