कुनिहार:-
हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के अंतर्गत आने वाली प्रसिद्ध शिव नगरी कुनिहार में एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। ऐतिहासिक एवं अनादि कालीन ‘शिव तांडव गुफा’ में हर महीने की परंपरा को निभाते हुए इस बार भी ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य धार्मिक आयोजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। गुफा विकास समिति और शंभू परिवार के सौजन्य से होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा:
गुफा विकास समिति के अध्यक्ष राम रतन तंवर, उपाध्यक्ष अमरीश ठाकुर और कोषाध्यक्ष गुमान सिंह कंवर ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन की शुरुआत पूरी तरह आध्यात्मिक और पारंपरिक विधि-विधान से होगी:
17 मई (आज): सुबह से ही शिव तांडव गुफा परिसर में श्री रामचरितमानस कथा का अखंड पाठ पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ शुरू कर दिया गया है, जो निरंतर जारी रहेगा।
18 मई सोमवार सुबह यज्ञ की पूर्णाहुति डाली जाएगी। इसके तुरंत बाद भगवान शंभू के अलौकिक शिवलिंग का विशेष पूजन, अर्चन और श्रृंगार संपन्न होगा।
विशाल भंडारा और भजन संध्या मुख्य आकर्षण:
आयोजकों ने बताया कि सोमवार को मुख्य पूजा और आरती के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के लिए बाबा का विशाल भंडारा (प्रसाद) शुरू कर दिया जाएगा, जो प्रभु इच्छा तक निरंतर चलेगा। इसके साथ ही, सोमवार शाम को एक भव्य भजन संध्या का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय व नामी कलाकारों द्वारा भोले बाबा के भजनों की अमृत वर्षा की जाएगी।
समिति की अपील:
गुफा विकास समिति ने समस्त क्षेत्रवासियों, प्रदेशवासियों और दूर-दराज से आने वाले शिव भक्तों से इस पावन अवसर पर सपरिवार शिरकत करने का विशेष आग्रह किया है। समिति के पदाधिकारियों ने निवेदन किया है कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर भोले बाबा का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें, भजन संध्या में हाजिरी लगाएं और भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य के भागी बनें।
आस्था और शांति का केंद्र है शिव तांडव गुफा:
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि शिव तांडव गुफा कुनिहार न केवल करोड़ों भक्तों की अगाध आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक दिव्यता और अलौकिक वातावरण हर किसी को आत्मिक शांति का अनुभव कराता है। इस तरह के मासिक आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समूचे क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना है।






