कुनिहार
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति में शामिल प्रदेश के विभिन्न राज्य स्तरीय 18 पेंशनर संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति को दरकिनार कर प्रदेश के मुट्ठीभर तथाकथित एवं स्वयंभू पेंशनर नेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा 21 सितंबर को वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने की संयुक्त संघर्ष समिति ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

यहां जारी प्रेस बयान में संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि गत 13 मई को जब मुख्यमंत्री ने संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया था, उस समय समिति में शामिल प्रदेश के 18 प्रमुख राज्य स्तरीय पेंशनर संगठनों के राज्य स्तरीय पदाधिकारी बैठक में मौजूद थे। इस दौरान सभी पदाधिकारियों का परिचय मुख्यमंत्री से करवाया गया था और उन्हें स्पष्ट रूप से अवगत करवाया गया था कि प्रदेश के करीब 85 प्रतिशत पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के साथ जुड़े हुए हैं।
शर्मा ने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा पूर्व में आयोजित तीन राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शनों में प्रदेश के सभी 12 जिलों से हजारों की संख्या में पेंशनरों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया था। इन प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार को पेंशनरों की एकता और उनकी मांगों के प्रति गंभीरता का स्पष्ट संदेश दिया गया था।
इसके बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा कुछ तथाकथित एवं पराजित नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पूर्व नियोजित योजना के तहत इन लोगों को मोहरा बनाकर प्रदेश के करीब दो लाख पेंशनरों को भ्रमित करने तथा प्रदेश के एकमात्र मजबूत एवं संयुक्त पेंशनर संगठन को तोड़ने का प्रयास कर रही है।
इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति सरकार की इस कथित रणनीति को किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी। प्रदेश के पेंशनर इन चालों को भली-भांति समझते हैं और अपने अधिकारों एवं मांगों के लिए संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले चट्टान की तरह एकजुट होकर संघर्ष करते रहेंगे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने 21 सितंबर को तथाकथित नेताओं के साथ वार्ता की, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि 18 सितंबर को बिलासपुर में होने वाली राज्य स्तरीय बैठक में सरकार के खिलाफ कड़े निर्णय लिए जाएंगे।
शर्मा ने कहा कि संघर्ष समिति की आगामी रणनीति के तहत सरकार के खिलाफ अभियान अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रखने पर भी निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश के 18 पेंशनर संगठनों के राज्य स्तरीय पदाधिकारी सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाकर आम जनता से संवाद करेंगे तथा सरकार की नीतियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में संयुक्त संघर्ष समिति के पास अपने प्रत्याशी उतारने अथवा उस विपक्षी दल को समर्थन देने का विकल्प भी मौजूद रहेगा, जो पेंशनरों की मांगों को पूरा करने की लिखित गारंटी देगा और उन्हें अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करेगा।
शर्मा ने स्पष्ट किया कि सही समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा और पेंशनरों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।






