दाड़लाघाट। विजयादशमी पर्व एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सरस्वती विद्या मंदिर दाड़लाघाट के खेल मैदान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भव्य पथ संचलन किया और शस्त्र पूजन किया। पथ संचलन में कुल 80 स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जिनमें 20 बाल स्वयंसेवक और 60 अन्य
स्वयंसेवक शामिल रहे। पथ संचलन सरस्वती विद्या मंदिर के खेल मैदान से शुरू होकर दाड़लाघाट बाजार से होते हुए आईटीआई तक निकाला गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर संचलन किया और समाज में राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से स्वयंसेवक सुबह ही दाड़लाघाट पहुंच गए थे। कार्यक्रम में शंकर ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक धनीराम ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। धनीराम ने संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने और 101वें वर्ष में प्रवेश करने पर स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संघ की शताब्दी यात्रा के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा किए गए संघर्ष और योगदान को याद करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने तथा धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन के अंतर्गत सामाजिक समरसता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय समाज में विभाजन को वर्ण और कर्म व्यवस्था के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि जातिगत आधार पर। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। ऐसे में देश को अपने सांस्कृतिक मूल्यों और धर्म के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ना होगा। धनीराम ने हिंदू समाज से संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा कि सशक्त और संगठित समाज ही भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में विजयादशमी के महत्व और संघ के स्थापना दिवस के संदेश को भी रेखांकित किया गया।






