दाड़लाघाट। संत निरंकारी सत्संग भवन दाड़लाघाट में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में स्थानीय क्षेत्र के अलावा आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत अवतार वाणी के गायन से हुई। सत्संग में पूर्व संयोजक महात्मा शंकर दास निरंकारी ने संगत को संबोधित करते हुए मानव जीवन में समय के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को मिला जीवन अनमोल है और इसे केवल सांसारिक मोह-माया में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। मानव जीवन का उद्देश्य परमात्मा की जानकारी प्राप्त कर सत्य के मार्ग पर चलना है। उन्होंने कहा कि अक्सर मनुष्य जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचकर अपने बीते समय को याद करता है और सोचता है कि भक्ति के लिए समय रहते प्रयास क्यों नहीं किया। इसलिए मनुष्य को बाद में पछताने के बजाय वर्तमान समय का सदुपयोग करते हुए परमात्मा की जानकारी और भक्ति से जुड़ना चाहिए। समय की उपयोगिता समझाने के लिए उन्होंने किसान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहली बारिश के बाद किसान यदि समय पर खेत में बीज डाल देता है तो आगे चलकर उसे फसल का लाभ मिलता है। लेकिन यदि वह सही समय निकल जाने के बाद बीज बोता है तो मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता। इसी प्रकार मानव जीवन में भी भक्ति का बीज समय रहते बोना आवश्यक है। महात्मा शंकर दास निरंकारी ने सेवा के
महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि सेवा तभी सार्थक होती है, जब उसे निर्धारित समय और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाए। समय का सदुपयोग और सेवा भावना जीवन को व्यवस्थित एवं सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य समय रहते सत्य की पहचान कर लेता है, उसका जीवन आनंद और भक्ति से भर जाता है। सत्संग के दौरान अन्य अनुयायियों ने भी विचार एवं भजनों के माध्यम से निरंकारी मिशन के संदेश को संगत तक पहुंचाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में निरंकारी श्रद्धालु मौजूद रहे।






