कुनिहार
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार में 28 अक्टूबर को ई-कचरा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता (Declamation Competition), प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा ई-कचरा संग्रहण जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के दुष्प्रभावों और उसके उचित निस्तारण के प्रति जागरूक किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने घरों से अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान एवं ई-कचरा एकत्रित कर विद्यालय में लाया तथा उसे निर्धारित काले रंग के कूड़ेदान में जमा किया। इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और घर-परिवार से ही ई-कचरा प्रबंधन की आदत को प्रोत्साहित करना था।
विद्यालय के ईको क्लब प्रभारी श्री मोहन लाल एवं श्रीमती प्रियंका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि मोबाइल फोन, चार्जर, बैटरी, कंप्यूटर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाला कचरा यदि खुले में फेंका जाए या जलाया जाए, तो इससे मिट्टी, जल एवं वायु प्रदूषित होते हैं। इस कचरे में मौजूद पारा, कैडमियम, जस्ता तथा प्लास्टिक जैसे हानिकारक पदार्थ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं। खाद्य शृंखला के माध्यम से इन प्रदूषकों की सांद्रता बढ़ने की प्रक्रिया, जिसे जैव आवर्धन (Biomagnification) कहा जाता है, जीव-जंतुओं एवं मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को 3R सिद्धांत—Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुनः उपयोग) और Recycle (पुनर्चक्रण) का महत्व समझाते हुए आग्रह किया कि ई-कचरे को सामान्य कचरे में न मिलाएं, न ही उसे खुले में जलाएं या फेंकें। इसके बजाय उसे अधिकृत ई-कचरा संग्रहण केंद्रों अथवा पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं तक पहुंचाने के लिए जागरूकता फैलाएं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री प्रताप सिंह रणौत ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने घरों से इस अभियान की शुरुआत करें और अपने परिवार, पड़ोस तथा समाज के लोगों को ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण के प्रति जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि आज की छोटी-छोटी जिम्मेदारियां ही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण की नींव रखती हैं। यदि हम इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन नहीं करेंगे, तो उसमें मौजूद विषैले तत्व पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदार उपभोक्ता बनते हुए ई-कचरे को उचित माध्यम से पुनर्चक्रण के लिए भेजने का संकल्प लेना चाहिए।






