दाड़लाघाट:- ग्राम पंचायत कश्लोग में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिन कथा स्थल पर पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा व्यास रवि गौतम ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए गोपियों के निष्काम भक्ति भाव को सर्वोच्च प्रेम का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएं जीवन को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। कथा प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विभिन्न असुरों के संहार का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं। साथ ही योगेश्वर श्रीकृष्ण के माध्यम से योग, ध्यान और आत्मिक साधना के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। कथा में यह भी बताया गया कि योग केवल शारीरिक क्रिया नहीं बल्कि मन, आत्मा और परमात्मा के मिलन का माध्यम है। अष्टांग योग के माध्यम से साधक आत्मिक शांति एवं जीवन में संतुलन प्राप्त करता है। इसके अतिरिक्त संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा गया कि शिक्षा व्यक्ति को योग्य बनाती है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा प्रदान करते हैं। अच्छे संस्कार परिवार, माता-पिता और समाज से प्राप्त होते हैं और जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं। कथा व्यास ने पारिवारिक जीवन में आपसी सहयोग, सम्मान और जिम्मेदारियों के निर्वहन को आवश्यक बताया तथा कहा कि धार्मिक कथाओं का उद्देश्य केवल श्रवण करना नहीं, बल्कि उनमें निहित शिक्षाओं को जीवन में अपनाना है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। कथा स्थल पर दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा।
कथा में अर्की-दाड़लाघाट कश्लोग-मांगू परिवहन सभा के अध्यक्ष वेदप्रकाश शुक्ला, एडीकेएम कोषाध्यक्ष एवं पंचायत सदस्य दाड़लाघाट तिलक गौतम, वरिष्ठ कांग्रेस नेता लाला शंकर दास अरोड़ा, पूर्व उपप्रधान दाड़ला राजेश गुप्ता, ठाकुरु राम, जय सिंह ठाकुर, गोपाल, लेख राम ठाकुर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।






