अर्की:-
“नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान” के अंतर्गत 17 जून 2026 से 26 जून 2026 तक विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 21 जून 2026 को शालाघाट कोटली ग्राउंड में अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम डॉ. मुक्ता रस्तोगी, खंड चिकित्सा अधिकारी , अर्की, जिला सोलन के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में डॉ विजय कुमार शांडिल, काउंसलर, एचआईवी काउंसलिंग एवं टेस्टिंग सर्विसेज, सिविल अस्पताल अर्की, जिला सोलन ने युवाओं को संबोधित करते हुए नशे के बढ़ते प्रचलन और इसके सामाजिक, मानसिक, शारीरिक तथा आर्थिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को नशे के जाल से बचाना समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और देश के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है।
उन्होंने युवाओं को बताया कि मादक पदार्थों का सेवन करने से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, मानसिक तनाव बढ़ता है तथा अनेक गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त नशे की लत व्यक्ति को अपराध, हिंसा और सामाजिक अलगाव की ओर भी धकेल सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में सकारात्मक गतिविधियों को अपनाएं, खेलकूद, शिक्षा और रचनात्मक कार्यों में भाग लें तथा नशे से दूर रहें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित युवाओं को “ नशे को ना कहें ” का संदेश दिया गया तथा नशे के विरुद्ध सामूहिक जनजागरूकता अभियान को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प ले, तो नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना संभव है।
डॉ. विजय कुमार शांडील ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को सही दिशा और उचित मार्गदर्शन प्रदान करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर नशा मुक्ति संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों और गतिविधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि नशे की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। युवाओं ने भी नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सहयोग देने और जागरूकता फैलाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी युवाओं एवं प्रतिभागियों को नशामुक्त जीवन जीने तथा समाज को नशे से मुक्त बनाने की शपथ दिलाई गई। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे, दूसरों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे तथा स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में देश के विकास में योगदान देंगे।
यह कार्यक्रम युवाओं में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नशा मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। स्वास्थ्य विभाग अर्की द्वारा भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखा जाएगा ताकि समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके और एक स्वस्थ एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सके।






