दाड़लाघाट:-दाड़लाघाट के नौणी गांव की 10 वर्षीय होनहार बेटी आस्था ठाकुर ने अपने बुलंद हौसलों, दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन का परिचय देते हुए दाड़लाघाट से शिमला तक लगभग 50 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दौड़ करीब आठ घंटे में पूरी कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पहाड़ी रास्तों, कठिन चढ़ाई और बीच-बीच में हुई बारिश जैसी चुनौतियों के बावजूद आस्था ने हार नहीं मानी और अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। शनिवार सुबह
करीब पांच बजे आस्था ने दाड़लाघाट से दौड़ शुरू की और दोपहर करीब एक बजे शिमला पहुंचकर अपनी दौड़ पूरी की। इतनी कम उम्र में इतनी लंबी दूरी तय कर उन्होंने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया, बल्कि क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गईं। विशेष बातचीत में आस्था ठाकुर ने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध सूफी रनर के वीडियो देखे थे। उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने भी लंबी दूरी की दौड़ पूरी करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह चुनौती कठिन जरूर लगी, लेकिन एक बार लक्ष्य तय कर लिया तो उसे हर हाल में पूरा करने की ठान ली। आस्था ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह व्यायाम करती हैं और करीब एक घंटे तक दौड़ का अभ्यास करती हैं। इस दौरान उनके पिता हमेशा उनके साथ रहते हैं।
उन्होंने बताया कि पूरी दौड़ के दौरान सबसे अधिक कठिनाई ऊंचाई वाले रास्तों पर हुई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आस्था ने कहा, मैंने पहले ही तय कर लिया था कि यह दौड़ हर हाल में पूरी करनी है। थकान जरूर हुई, लेकिन मैंने उसका डटकर मुकाबला किया। मेरा उद्देश्य केवल दौड़ पूरी करना नहीं था, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को नशे जैसी बुराई से दूर रहने का संदेश देना भी था। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य दाड़लाघाट से कुनिहार तक दौड़ पूरी करना है। यह दौड़ मंगलवार या बुधवार को आयोजित करने की योजना है। यदि कोई इस अभियान में उनके साथ जुड़ना चाहता है तो इसकी सूचना उनके सोशल मीडिया पेज पर साझा की जाएगी। आस्था ने बताया कि उनका सपना आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है। इसके साथ ही वह भविष्य में किसी अच्छी एथलेटिक्स अकादमी से प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करना चाहती हैं।
आस्था की माता निशा ठाकुर ने बताया कि जब बेटी ने इतनी लंबी दौड़ की बात कही तो वह काफी घबरा गई थीं। खराब मौसम और कम उम्र को देखते हुए उन्हें लगा था कि आस्था शायद कराड़ा या अधिक से अधिक दानोघाट तक ही पहुंच पाएगी। वहीं पिता सुनील ठाकुर ने बेटी का पूरा सहयोग किया और पूरे सफर में उसके साथ रहे। लेकिन आस्था ने अपने हौसले और आत्मविश्वास के दम पर सुबह पांच बजे शुरू हुई दौड़ को दोपहर एक बजे शिमला पहुंचकर सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया। आस्था की इस उपलब्धि पर उनकी माता निशा ठाकुर, पिता सुनील ठाकुर, परिवारजनों तथा क्षेत्रवासियों ने खुशी व्यक्त की। सोशल मीडिया पर भी उनकी दौड़ के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और प्रदेशभर से उन्हें सराहना मिल रही है। इस उपलब्धि पर विधायक अर्की संजय अवस्थी, पूर्व उपप्रधान दाड़लाघाट राजेश गुप्ता, पंचायत प्रधान श्याम सिंह चौधरी, उपप्रधान हेमराज गौतम, जिला परिषद सदस्य मीनाक्षी ठाकुर, पूर्व पंचायत समिति अध्यक्षा सोमा कौंडल, पूर्व जिला परिषद सदस्य राम कृष्ण शर्मा, ग्राम पंचायत रौड़ी की प्रधान मधु बाला, उपप्रधान मदन शर्मा, ग्राम पंचायत बरायली के प्रधान कृष्ण चंद भट्टी, पंचायत समिति सदस्य संगीता सोनी, मोहन सिंह ठाकुर, वेदप्रकाश शुक्ला, राम कृष्ण बंसल, जगदीश ठाकुर, जय सिंह ठाकुर, मनोज, राजेंद्र, सुरेंद्र शुक्ला, बंसी राम भाटिया, जय पाल चौधरी, लेखराज, हेमराज सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य लोगों ने आस्था को बधाई देते हुए कहा कि उनका यह साहसिक प्रयास पूरे क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि आस्था भविष्य में खेल जगत में नई ऊंचाइयों को छूकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगी।






